दिल्ली हादसा: बेटे का शव देख बेसुध हुई मां, परिवार का इकलौता सहारा था हेम; भाई को बनाना चाहता था इंजीनियर
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/22/article/image/Jagran-News-(582)-1771725800556_m.webpमां और मृतक हेम का फाइल फोटो। जागरण
मुकेश ठाकुर, पश्चिमी दिल्ली। दिल्ली की सड़कों पर दौड़ती तेज रफ्तार मौत ने न सिर्फ एक युवक की जान ली, बल्कि एक संघर्षशील परिवार की उम्मीदों का गला घोंट दिया।
शनिवार सुबह करीब चार बजे तिलक नगर हादसे के बाद जब मृतक हेम शंकर के दोस्त उनकी मां रुक्मणी को लेकर डीडीयू अस्पताल पहुंचे, तो वहां स्ट्रेचर पर अपने लाडले का क्षत-विक्षत शव देखकर वह बेसुध होकर फर्श पर गिर पड़ीं। बदहवास मां को देख वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
यह उस बेटे का अंत था, जिसने मां को आराम देने के लिए दिन-रात एक कर दिया था। रुक्मणी ने रुंधे हुए गले से बताया कि वर्ष 2015 में पति नंद किशोर की मृत्यु के बाद उन्होंने लोगों के घरों में झाड़ू-पोछा (घरेलू सहायिका) कर तीनों बेटों को पाला था। तीन साल पहले जब रुक्मणी का स्वास्थ्य बिगड़ा, तो हेम शंकर ने मां को काम पर जाने से रोक दिया और खुद घर की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली।
https://smart-cms-bkd-static-media.jnm.digital/jagran-hindi/images/2026/02/22/template/image/Jagran-News---2026-02-21T093735.652-1771726053447.jpg
इसी कार ने मारी थी टक्कर। जागरण
रुक्मणी बताती हैं कि हेम ने वादा किया था कि वह जल्द ही इस जर्जर हो चुके घर की मरम्मत करवाएगा और इसे नया बनवाएगा, लेकिन अब घर बनने से पहले ही घर का चिराग बुझ गया।
हेम शंकर अपने 12 वर्षीय छोटे भाई समर को एक बेहतर भविष्य देना चाहता था। वह चाहता था कि समर बड़ा होकर कंप्यूटर इंजीनियर बने। इसी सपने को पूरा करने और घर का खर्च चलाने के लिए वह पूरी-पूरी रात डिलीवरी ब्वॉय का काम करता था। अभी से ही हेम ने अपने भाई को अलग से कंप्यूटर सिखाने के लिए ट्यूशन में डाल रखा था।
हादसे वाली रात भी वह मां के हाथ का खाना खाकर काम पर निकला था, यह वादा करके कि वह सुबह जल्दी लौटेगा। पर वह तो नहीं लौटा उसकी जगह उसके मौत की खबर आई।
वह कहती हैं कि हेम के घर को लेकर बहुत सारे सपने थे, पति की मौत के बाद तीन बच्चों के बोझ से उनकी आर्थिक स्थिति के खराब रहने के कारण वह कभी अपना घर मरम्मत तक नहीं करवा पाई थी।
https://smart-cms-bkd-static-media.jnm.digital/jagran-hindi/images/2026/02/22/template/image/Jagran-News-(559)-1771726096185.jpg
हादसे में क्षतिग्रस्त हुई स्कूटी। जागरण
हेम ने अपनी मां से वादा किया था कि वह जल्द ही बी ब्लाक, जेजे कालोनी रघुबीर नगर के अपने घर की मरम्मत करवाने की योजना बना रहा था। इसके लिए दिन रात मेहनत में लगा था। मां कहती है कि अब तो हमें खाना खिलाने वाला भी नहीं रहा।
आरोपी के कार पर है 14 चालान लंबित
द्वारका हादसा और तिलक नगर के इस हादसे में कुछ चीजें समान है। जहां दोनों ही स्थानों पर हादसे का कारण ओवर स्पीड बना है, वहीं यहां भी द्वारका हादसा की तरह ही जिस वर्ना कार ने हेम शंकर को रौंदा, उस पर पहले से ही 14 ट्रैफिक चालान लंबित हैं।
यह भी पढ़ें- दिल्ली में कार की टक्कर से डिलीवरी बॉय की मौत, चश्मदीदों का दावा- 150kmph की स्पीड में थी गाड़ी
इनमें से अधिकांश चालान ओवर स्पीडिंग के हैं, जो दिल्ली की विभिन्न सड़कों पर देर रात दर्ज किए गए थे। यह साफ दर्शाता है कि आरोपित मोहित कुमार की यह हरकत उनके आदत में शामिल थी।
वह आए दिन रात के समय दिल्ली की सड़कों पर हाई स्पीड में गाड़ी दौड़ता था। यहां भी मृतक के जीजा ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि अगर पुलिस ने 14 चालान होने के बावजूद इस कार और चालक पर पहले ही सख्ती की होती, तो आज हेम शंकर जिंदा होता।
Pages:
[1]