JNU में दलितों पर दिए गए विवादित बयान को लेकर छात्रों ने कुलगुरु का फूंका पुतला, इस्तीफे की मांग तेज
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/22/article/image/download-1771709778915_m.webpजागरण संवाददाता, नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की कुलगुरु शांतिश्री डी. पंडित के यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 व दलित और अश्वेत लोग हमेशा पीड़ित बनकर या विक्टिम कार्ड खेलकर आगे तरक्की नहीं कर सकते वाले बयान को लेकर परिसर में विवाद गहराता जा रहा है।
छात्र संगठनों और शिक्षक संघों ने बयान को लेकर तीखी आपत्ति जताते हुए कुलगुरु से इस्तीफे की मांग की है। विरोध स्वरूप छात्र संघ ने शनिवार को पुतला दहन कर प्रदर्शन भी किया, जबकि रविवार रात “समता जुलूस” निकालने का आह्वान किया गया है।
जेएनयू छात्र संघ के महासचिव सुनील यादव ने आरोप लगाया कि एक पॉडकास्ट में कुलगुरु ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के इक्विटी रेगुलेशन को अनावश्यक बताया और एक वर्ग विशेष पर टिप्पणी की। उनके अनुसार, यह बयान अस्वीकार्य है और विश्वविद्यालय की समावेशी परंपरा के विपरीत है।
वहीं जेएनयू शिक्षक संघ के अध्यक्ष सुरजीत मजूमदार ने टिप्पणी को “चौंकाने वाला और शर्मनाक” बताते हुए कहा कि इस तरह का वक्तव्य विश्वविद्यालय के मूल मूल्यों से मेल नहीं खाता और कुलगुरु को पद छोड़ देना चाहिए। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की केंद्रीय कार्यकारी समिति ने भी बयान की निंदा करते हुए कहा कि जब वंचित समुदायों के छात्र समान अवसर और गरिमा के लिए संघर्ष कर रहे हों, तब शीर्ष पद से इस प्रकार की टिप्पणी गैर-जिम्मेदाराना और असंवेदनशील है।
हालांकि पूरे विवाद पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। छात्र संगठनों का कहना है कि जब तक स्पष्ट स्पष्टीकरण या कार्रवाई नहीं होती, विरोध जारी रहेगा। इस मुद्दे ने परिसर की अकादमिक राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है और आने वाले दिनों में आंदोलन तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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