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पुतिन का मास्टरस्ट्रोक: वैगनर के नेटवर्क को अब सीधे नियंत्रित करेगी रूसी खुफिया एजेंसी, अफ्रीका में बढ़ेगा तनाव

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एसवीआर ने अब वैगनर ग्रुप के सबसे प्रभावी उपकरण पर कब्जा कर लिया है (फोटो- रॉयटर)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली।। एक नई अंतरराष्ट्रीय जांच के अनुसार, येवगेनी प्रिगोजिन की मौत के बाद रूस की विदेशी खुफिया सेवा एसवीआर ने अफ्रीका में वैगनर ग्रुप के प्रभाव और दुष्प्रचार अभियानों पर पूर्ण नियंत्रण कर लिया है। फॉरबिडन स्टोरीज, ऑल आइज़ ऑन वैगनर, डॉसियर सेंटर, ओपनडेमोक्रेसी और आईस्टोरीज सहित कई खोजी मीडिया संगठनों के संघ ने 1,431 पृष्ठों के लीक दस्तावेजों का विश्लेषण कर यह खुलासा किया है।

प्रिगोजिन की 2023 में विमान दुर्घटना में मौत के बाद वैगनर के सैन्य संचालन को रूसी रक्षा मंत्रालय ने अफ्रीका कोर के नाम से नए ढांचे में समाहित करने की कोशिश की, लेकिन प्रभाव, प्रचार और राजनीतिक हस्तक्षेप के क्षेत्र में एसवीआर ने कमान संभाल ली। जांच में कहा गया है कि “एसवीआर ने अब वैगनर ग्रुप के सबसे प्रभावी उपकरण पर कब्जा कर लिया है।“

लीक दस्तावेजों के आधार पर पता चला कि वैगनर की पूर्व प्रभाव शाखा, जिसे अफ्रीका पॉलिटोलॉजी या “द कंपनी“ कहा जाता है, में करीब 100 सलाहकार काम कर रहे हैं। 2024-2025 में इनकी टीमें अंगोला, बोलीविया, बुर्किना फासो, चाड, घाना, लीबिया, माली, नाइजर, सूडान, मेडागास्कर, जिम्बाब्वे, मिस्र, कैमरून, बेनिन और नामीबिया सहित कई देशों में सक्रिय रहीं।

एसवीआर इन अभियानों में खुफिया जानकारी प्रदान करता है, स्रोत भर्ती करता है, पहुंच बनाता है और प्रभावशाली एजेंटों को रणनीतिक भूमिकाओं में तैनात करता है। जांच में सीनगल में सैन्य तख्तापलट का परिदृश्य तैयार करने, माली में फ्रांस-अमेरिका विरोधी खुफिया साझा करने और साहेल राज्यों (माली, बुर्किना फासो, नाइजर) के नए गठबंधन एईएस (Alliance of Sahel States) को मजबूत करने में रूस की भूमिका का जिक्र है।
बजट और प्रभाव

जनवरी से अक्टूबर 2024 तक इन प्रभाव अभियानों पर लगभग 73 लाख डॉलर (मासिक औसतन 7.5 लाख डॉलर) खर्च हुए। फ्रंट कंपनियों के जरिए फंडिंग की जाती है। हालांकि जांचकर्ताओं का कहना है कि बड़े बजट और लंबी रणनीति के बावजूद रूस को ठोस आर्थिक लाभ (जैसे खनन समझौते) में ज्यादा सफलता नहीं मिली है।

जांच के सह-लेखक लू ओसबोर्न ने बताया कि साहेल के अस्थिर और कमजोर देशों में रूस को राजनीतिक सफलता मिली है, जहां फ्रांस और पश्चिमी प्रभाव कम हो रहा है। यह खुलासा अफ्रीका में रूस की बढ़ती घुसपैठ को दर्शाता है, जहां वह पश्चिमी शक्तियों को चुनौती दे रहा है।
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