राष्ट्र के सजग प्रहरी की भूमिका निभा रहे सीमांत क्षेत्र के लोग, चमोली में सीएम धामी ने कही यह बात
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/21/article/image/CM-Dhami-In-Chamoli-1771695412179_m.webpचमोली के बिरही बेडुबगड़ जनजाति समागम कार्यक्रम में संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। जागरण
संवाद सहयोगी, गोपेश्वर। सीमांत क्षेत्र में रहने वाले जनजातीय समुदाय के लोगों ने परंपराओं, लोकज्ञान और प्रकृति के संरक्षण की भावना को तो मजबूती दी ही है, वह सीमाओं पर राष्ट्र के सजग प्रहरी की भूमिका भी निभा रहे हैं। सीमावर्ती गांवों का विकास राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण अंग है।
शनिवार को चमोली जिले के बिरही-बेडूबगड़ में नीती-माणा जनजाति कल्याण समिति की ओर से आयोजित तीन दिवसीय भोटिया जनजाति समागम के समापन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिहं धामी ने यह बात कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के आयोजन जनजातीय परंपराओं व सांस्कृतिक विरासत को सहेजकर उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम हैं।
इनके माध्यम से जहां सामाजिक समरसता व एकता को मजबूती मिलती है, वहीं नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर भी मिलता है।
उन्होंने सामाजिक सद्भाव एवं सांस्कृतिक संरक्षण के लिए सामूहिक सहभागिता की जरूरत पर भी बल दिया और कहा कि जनजातीय समुदाय का जीवन हमेशा संघर्ष, अनुशासन और सामूहिकता की अनुपम मिसाल रहा है।
इसलिए जरूरी है कि जनजातीय परंपरा के पारंपरिक ज्ञान, स्थानीय उत्पाद और प्राकृतिक संसाधनों को सहेजा जाए, ताकि इस ज्ञान का भविष्य की पीढ़ियों तक पहुंच सके।
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