cy520520 Publish time 2026-2-21 22:27:24

शाहजहांपुर: विश्वासघात का खौफनाक अंत, 9 साल बाद हत्यारे मौसा को कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

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प्रतीकात्मक चित्र



जागरण संवाददाता, शाहजहांपुर। 50 हजार रुपये की उधारी वापस मांगने पर युवक के हत्यारे मौसा रामभरोसे को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। शनिवार को अपर जिला जज नुसरत खान ने निर्णय सुनाया। उन्होंने दोषी पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।

पुवायां के कुरगंजा मुहल्ला निवासी गीता देवी की पहली शादी रामसरन से हुई थी। 10 वर्ष बाद तलाक होने पर दूसरी शादी बंटी से कर ली थी। वह उनके साथ कुरगंजा मुहल्ले में ही रहने लगीं। गीता ने बताया कि उनकी बहन मोरकली की शादी हरदयाल कूंचा निवासी रामभरोसे से हुई थी।

रिश्तेदारी होने के कारण दोनों परिवारों को एक-दूसरे के घर आना-जाना था। वर्ष 2015 में रामभरोसे एक मुकदमे में फंसा तो मोरकली ने मदद मांगी। उन्होंने कहा कि पति को पैरवी के लिए 50 हजार रुपये उधार चाहिए। उस समय आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के बावजूद बेटे राहुल ने भैंस बेचकर 50 हजार रुपये मौसा रामभरोसे को दिए थे।

कुछ महीने बाद उन्होंने रुपये वापस मांगे तो रामभरोसे टालमटोल करने लगा। एक वर्ष तक उधारी वापस नहीं मिलने पर राहुल ने आपत्ति जताई, जिस पर रामभरोसे रंजिश मान बैठा। छह अगस्त 2015 को रात आठ बजे बेटा राहुल व बेटी लक्ष्मी घर में थी। उसी दौरान रामभरोसे घर में घुसा और राहुल के सीने पर तमंचा रखकर गोली मार दी।

लक्ष्मी ने शोर शराबा किया तो वह बाइक से भाग गया। इस बीच राहुल को अस्पताल ले गए मगर, उनकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने रामभरोसे को गिरफ्तार कर 21 सितंबर 2015 को आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। शासकीय अधिवक्ता संतोष कुमार त्रिवेदी ने बताया कि गवाहों के बयान, साक्ष्य के आधार पर अपर जिला जज ने रामभरोसे को दोषसिद्ध साबित होने पर सजा सुनाई।



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