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ट्रंप टैरिफ पर यूएस सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उलझन में फंसे भारतीय निर्यातक, क्या हैं मुश्किलें?

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद खिचीं चिंता की लकीरें।



जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ट्रंप प्रशासन के टैरिफ व्यवस्था रद तो हो गई है और इससे भारतीय निर्यात के एक बड़े हिस्से को फायदा होता दिख रहा है लेकिन इसके साथ ही दूसरी कई तरह की नई जटिलता पैदा होती दिख रही है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने 150 दिनों के लिए सभी देशों पर 10 फीसद का अस्थायी आयात शुल्क लगाने का नयी अधिसूचना जारी की है। ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 की तहत उठाए गये इस कदम से भारत व अमेरिका के बीच कारोबारी संबंधों को लेकर जारी अनिश्चितता और बढ़ती नजर आ रही है।
भारत को क्या फायदा?

मोटे तौर पर इस आदेश के बाद भारत पर लागू आयात शुल्क की मौजूदा दर 18 फीसद अब समाप्त हो गई है। अमेरिका को होने वाले 55 फीसद भारतीय निर्यात पर शुल्क की नई दर 12-13 फीसद रह जाएगी। इसके अलावा 40 फीसद निर्यात पर शुल्क की दर 10 फीसद ही रहने की संभावना है।

ऐसी अनिश्चतता में अगले हफ्ते दोनों देशों के बीच की प्रस्तावित कारोबारी वार्ता भी अब बेमानी लग रही है। संभवतः यहीं कारण है कि केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने बहुत ही सधी हुई प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह अभी अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अध्ययन कर रहा है।

वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय ने एक संक्षिप्त बयान जारी कर कहा, “हमने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नोट किया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी इस संबंध में प्रेस कांफ्रेंस की है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा कुछ कदम उठाए गए हैं। हम इन सभी घटनाक्रमों का अध्ययन कर रहे हैं और उनके प्रभावों का मूल्यांकन कर रहे हैं।”
क्या होगी आगे की रणनीति?

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वह स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आगे की रणनीति तय करेगा। अधिकारियों का कहना है कि रोजाना वस्तुस्थिति बदल रही है और आगे भी अनिश्चितता है। मसलन, व्हाइट हाउस की तरफ से जारी आदेश सिर्फ 150 दिनों के लिए है।

अभी यह साफ नहीं है कि क्या ट्रंप प्रशासन अब दोबारा से उस हर देश से ट्रेड वार्ता करेगी जिनके साथ पहले समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त कई उत्पादों के आयात को लेकर स्पष्टता नहीं है यानी कौन-सा उत्पाद छूट की श्रेणी में आएंगे, किन पर अतिरिक्त जांच (सेक्शन 301) जैसी कार्रवाई हो सकती है, यह अभी अस्पष्ट है।

ऐसे में मार्च, 2026 में भारत-अमेरिका के बीच संभावित ट्रेड डील की संभावना भी कम ही है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (20 फरवरी 2026) को राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक पारस्परिक शुल्क को अवैध घोषित करते हुए फैसला दिया था कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (आइईईपीए) के तहत राष्ट्रपति को इतने बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है।
अंतरिम समझौते की हो दोबारा जांच

भारत में अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर प्रतिष्ठित शोध एजेंसी जीटीआरआई के महानिदेशक अजय श्रीवास्तव का कहना है कि पारस्परिक शुल्क अब समाप्त हो गया है और इसकी जगह पर ट्रंप प्रशासन के नये आदेश के तहत 24 अप्रैल, 2025 से नई 10 फीसद की नई दर लागू होगी। 10 फीसद की नई दर मस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) के तहत फरवरी, 2025 से पहले लागू दर के अतिरिक्त होगी। भारत के अधिकांश उत्पादों पर यह दर 2-3 फीसदी थी।

जीटीआरआइ का आकलन है कि भारत के करीब 55 फीसद उत्पादों पर 12-13 फीसद का शुल्क अमेरिका में लगेगा। ऐसे में भारत को अब इस अंतरिम समझौते को दोबारा जांचना चाहिए।
ट्रंप ने क्या कहा?

इसी बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार देर रात प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि भारत के साथ डील में कुछ नहीं बदला और 18 फीसद टैरिफ वाली व्यवस्था बरकरार रहेगी, लेकिन व्हाइट हाउस के अधिकारियों व नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के अधिकारियों ने भी कहा है कि भारत पर नया ग्लोबल टैरिफ (10 फीसद) ही लागू होगा।
कारोबारी जगत ने जताई चिंता

कारोबारी जगत के लोगों ने भारत के सबसे बड़े कारोबारी साझेदार देश अमेरिका के साथ शुल्क को लेकर जारी अनिश्चितता पर चिंता जताई है। इनका कहना है कि एक वर्ष के भीतर भारतीय निर्यातकों को कभी 25 फीसद तो कभी 50 फीसद तो कभी 18 फीसद और 10 फीसद के शुल्क के हिसाब से सामंजस्य बिठाना होगा। यह भी अनिश्चत है।

इन लोगों ने आगे कहा कि आयात निर्यात के समझौते कई महीनों के होते हैं और अभी यह नहीं मालूम है कि 150 दिनों बाद क्या शुल्क होगा, ऐसे में आगे की रणनीति बनाना मुश्किल होगा। भारतीय अधिकारियों को इन मुद्दों को अमेरिकी वार्ताकारों के समक्ष उठानी चाहिए।

सनद रहे कि अगले हफ्ते एक भारतीय दल के अमेरिका जाने की तैयारी है। जबकि अमेरिका के वाणिज्य सचिव के भी जल्द ही भारत दौरे पर आने की बात राजदूत सर्जियो गोर ने कही है।

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