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बिहार राज्यसभा चुनाव: 5वीं सीट पर राजद की नजर, तेजस्वी निकाल रहे गुणा-गणित; कैसे होगा बेड़ा पार?

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विकाश चन्द्र पाण्डेय, पटना। इस बार महागठबंधन से अधिक तेजस्वी यादव के लिए अपने को दमदार सिद्ध करने की चुनौती है, क्योंंकि अब वे राजद के कार्यकारी अध्यक्ष हैं।

इस भूमिका में उनकी पहली परीक्षा राज्यसभा की रिक्त हो रही पांच सीटों के चुनाव के दौरान हो जानी है। इसीलिए सुप्रीमो लालू प्रसाद भी दांव-पेच में कोई कसर नहीं छोड़ रहे, क्योंकि यह चुनाव महागठबंधन की एकजुटता का परिचायक होगा और इसके जरिये मुसलमानों के कथित रहनुमाओं के साथ-बात की पोल भी खुल जानी है।

यही कारण है कि राजद उस पांचवीं सीट को झटकने के लिए हर जतन कर रहा, जिस पर एनडीए की स्थिति अपेक्षाकृत अधिक मजबूत है। फिर भी विपक्ष की साख बचाए रखने के उद्देश्य से एनडीए की एकतरफा जीत में अड़ंगा डालने की रणनीति बनाई जा रही है।

16 मार्च को जिन पांच सीटों पर चुनाव होना है, उनमें तीन सत्ताधारी एनडीए की हैं और दो राजद की। विधानसभा के संख्या बल के हिसाब से चार सीटों पर एनडीए को कोई चुनौती नहीं।

पांचवीं सीट के लिए उसे प्रथम वरीयता के अतिरिक्त तीन वोटों का जुगाड़ करना है। महागबंधन के अगर सभी 35 विधायक एकजुट रहते हैं, तो भी उसे छह वोट अतिरिक्त जुटाने होंगे।

स्पष्ट है कि उसके लिए चुनौती कठिन है, लेकिन राजद नेतृत्व के स्तर पर यह प्रयास चल रहा कि एआईएमआईएम के पांच और बसपा के एक विधायक को किसी तरह साध लिया जाए। इसके साथ ही क्रास वोटिंग की संभावना भी देखी जाए।

इसके लिए एनडीए के छोटे घटक दलों को निशाने पर रखा गया है, जहां महत्वाकांक्षा अधिक है। हालांकि, स्वयं महागठबंधन भी अपनी एकजुटता को लेकर आश्वस्त नहीं।

कांग्रेस के बदले हुए मिजाज से राजद के लिए तालमेल बना पाना सहज नहीं। अलबत्ता वह वामदलोंं को लेकर आश्वस्त हो सकता है। एकमात्र विधायक वाली इंडियन इंक्लूसिव पार्टी (आईआईपी) को भी कुछ अधिक महत्व इसीलिए मिल रहा, क्योंकि बिहार में गठबंधन का स्वरूप कभी स्थायी नहीं रहा है।

रही बात बसपा की, तो उसका अब तक का इतिहास सत्ताधारी गठबंधन के साथ रहने का है। इनके बाद एक आसरा एआईएमआईएम का है, जिसने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी मंशा \“मोहरा\“ से आगे \“खिलाड़ी\“ बनने की है। इस शर्त पर कांग्रेस सहमत भी हो जाए, लेकिन राजद के लिए यह आत्मघाती निर्णय होगा।

यही पर आकर बात के बेपटरी हो जाने की आशंका है, जैसा कि राजद के एक नेता बता रहे। इसके बावजूद पांचवीं सीट के लिए आखिरी क्षण तक संभावना देखी जाएगी, क्योंकि इस सीट का दावेदार पार्टी के दूसरे खर्चों के लिए बड़ा मददगार हो सकता है।
तीन तिगाड़े

1. आईपी गुप्ता को राजद ने एआईएमआईएम को साधने के लिए लगाया है। एआईएमआईएम की शर्त है कि प्रत्याशी उसका हो और समर्थन महागठबंधन के शेष घटक करें।

2. पिछली बार राज्यसभा की एक सीट के लिए कांग्रेस को राजद ने समर्थन किया था। अब प्रतिदान के लिए स्मरण कराया जा रहा। हालांकि, इस चुनाव में ह्वीप जारी नहीं होता और विधायकों का कोई भरोसा नहीं।

3. राजद को हराकर सतीश सिंह यादव बसपा के विधायक बने हैं। अब समर्थन करते हैं, तो राजनीतिक भविष्य के लिए अनिश्चय की स्थिति होगी।
गुणा-गणित

राज्यसभा की एक सीट के लिए प्रथम वरीयता के 41 वोट चाहिए। एनडीए के 202 और महागठबंधन के 35 विधायक हैं। एनडीए में भाजपा-जदयू की दो-दो सीटें तय मानी जा रहीं। पांचवीं सीट किसी तीसरे घटक दल को मिलेगी।

एनडीए में पांच दल हैं। ऐसे में दो दलों की नाराजगी की चर्चा इसलिए बेमानी है, क्योंकि मंत्रिपरिषद में उन्हें पूर्ण सहभागिता मिली हुई है और आगे विधान परिषद के लिए बड़ी आशा है। महागठबंधन के साथ ऐसी कोई संभावना नहीं।
दल-बल

एनडीए : भाजपा : 89, जदयू : 85, लोजपा : 19, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा : 5, राष्ट्रीय लोक मोर्चा : 4
महागठबंधन : राजद : 25, कांग्रेस : 6, माले : 2, माकपा : 1, आइआइपी : 1
अन्य : एआईएमआईएम : 5, बसपा : 1
रिक्त सीटें

[*]जदयू : हरिवंश नारायण सिंह, रामनाथ ठाकुर
[*]रालोमो : उपेंद्र कुशवाहा
[*]राजद : प्रेमचंद गुप्ता, एडी सिंह


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