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चिकन नेक और ब्रह्मपुत्र के नीचे भारत बनाएगा सुरंग, ब्रह्मपुत्र प्रोजेक्ट को केंद्रीय कैबिनेट से मिली मंजूरी

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चिकन नेक भारत के लिए इतना जरूरी क्यों?



एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। पूर्वोत्तर भारत को देश के अन्य राज्यों से जोड़ना वाला \“सिलीगुड़ी कॉरिडोर\“, जिसे \“चिकन नेक\“ के नाम से भी जाना जाता है अब भारत की एक सैन्य ताकत बनने की राह पर है। भारत अब इस संवेदनशील इलाके पर \“भूमिगत रेल सुरंग\“ और असम में ब्रह्मपुत्र के नीचे लंबी सुरंग बनाने की योजना बना रहा है। ये दोनों की परियोजना भारत की सैन्य सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास दृष्टिकोण से बेहद ही अहम है।

दरअसल हाल ही में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में केंद्रीय बजट पेश होने के बाद जानकारी साझा करते हुए बताया है कि भारत सिलीगुड़ी के इस प्रोजेक्ट पर 35.76 किमी लंबी दो अलग-अलग सुरंग बनाने की तैयारी में है।


सिलीगुड़ी कॉरिडोर में बनने वाली ये सुरंग न केवल भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम है, बल्कि भारत की सुरक्षा एवं सैन्य दृष्टिकोण से भी ये सुरंग भारत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। ऐसे में ये प्रोजेक्ट भारत के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है और बांग्लादेश, चीन व नेपाल की सीमाओं से लगने वाले \“चिकन नेक\“ की क्या प्रासंगिकता है, जानेंगे इस लेख के जरिये।
क्यों इतना अहम है \“चिकन नेक\“

\“चिकन नेक\“ वह पतला गलियारा है, जो पूर्वोत्तर भारत को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ता है। इसे \“सिलीगुड़ी कॉरिडोर\“ के नाम से भी जाना जाता है। इस कॉरिडोर की औसतन चौड़ाई 22 किलोमीटर है। इस कॉरिडोर के चारों ओर नेपाल, बांग्लादेश, भूटान और चीन (तिब्बत क्षेत्र) की सीमाएं लगती है। यह कॉरिडोर भारत के लिए सुरक्षा, सैन्य और रणनीतिक दृष्टकोण से बेहद ही अहम है। यह संकरा रास्ता पूर्वोत्तर राज्यों को देश के अन्य राज्यों से जोड़ने का एकमात्र मार्ग है। इसी गलियारे से सेना के जवानों और हथियारों की आवाजाही होती है। इसलिए यह कॉरिडोर भारत के लिए बेहद ही महत्वपूर्ण है।

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\“सिलीगुड़ी कॉरिडोर\“ के लिए क्या है विशेष तैयारी

भारत सरकार की ओर से इस गलियारे में 35.76 किमी लंबी दो अलग-अलग सुरंगे बनाने की तैयारी की जा रही है। यह लाइन पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले के तीन माइल हाट से शुरू होकर सिलिगुड़ी के रांगापानी और बागडोगरा पर खत्म होगी। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 12,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस प्रोजेक्ट के तहत यहां दो अलग-अलग आधुनिक तकनीकों से लैश टनलिंग मशीन के जरिये सुरंग बनाई जाएगी।
यह रेल लाइन इतनी महत्वपूर्ण क्यों

जैसा की हमने आपको पहले ही बताया कि ये रेल लाइन भारत के लिए भविष्य में किसी वरदान से कम नहीं है। इस सुरंग की मदद से सेना के जवानों को सैन्य हथियारों को सुरक्षित सीमा पार ले जाने, प्राकृतिक और आपदा की भयावह स्थिति में राहत सामग्री पहुंचाने और ब्लॉकेड के समय सुरक्षित रहने के लिए मददगार साबित होगी। इसके साथ ही इसी रेलवे लाइन के बिल्कुल नजदीक बागडोगरा में एयरपोर्ट है और उसी के पास भारतीय सेना का 33वां कोर का मुख्यालय भी है, जिससे रेलवे लाइन और उड़ानों के बीच संपर्क साधने में मदद मिलेगी।
ब्रह्मपुत्र के नीचे देश की पहली सुरंग

ब्रह्मपुत्र के नीचे लंबी सुरंग बनाने की योजना पर केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है। अब ब्रह्मपुत्र के नीचे देश की पहली सुरंग बनाई जाएगी। बता दें, यह सुरंग कुल 14 किमी की होगी। इस प्रोजेक्ट के तहत चार लाइन वाली दो समांतर सुरंग होगी, जिसमें से एक सुरंग ट्रेन के लिए उपयोग की जाएगी और दूसरी सुरंग वाहनों की आवाजाही के लिए बनाई जाएगी। बता दें, ब्रह्मपुत्र के नीचे बनाई जाने वाली देश की पहली सुरंग को गोहपुर को नुमलीगढ़ से जोड़ा जाएगा। इस सुरंग को बनाने से दूरी ओर समय दोनों में बचत होगी।

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