नमो भारत की A टू Z डिटेल: 55 मिनट में 82 KM का सफर, लंदन-हांगकांग को कैसे पछाड़ रही है भारत की हाईस्पीड ट्रेन?
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/21/article/image/Jagran-News-(568)-1771659037594_m.webpनमो भारत ट्रेन का रूट मैप। जागरण
मुहम्मद रईस, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आधुनिक, तेज और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने वाला ‘नमो भारत’ प्रोजेक्ट अपने अंतिम चरण में है। 180 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड और 160 किमी प्रति घंटे की अधिकतम परिचालन गति वाले इस हाई-स्पीड, हाई-फ्रीक्वेंसी रेल सिस्टम का उद्देश्य दिल्ली और आसपास के शहरों के बीच यात्रा को तेज, सुरक्षित और आरामदायक बनाना है।
परियोजना की कुल लागत 30,274 करोड़ रुपये है। फंडिंग में एडीबी (लगभग 1 अरब डॉलर), एनडीबी (500 मिलियन डॉलर) और एआइआइबी (500 मिलियन डॉलर) का योगदान है।
किसकी कितनी हिस्सेदारी?
केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत, दिल्ली सरकार की 3.22 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश सरकार की 16.78 प्रतिशत है। इसकी नींन आठ मार्च 2019 को रखी गई थी। चार वर्ष के भीतर ही 20 अक्टूबर 2023 को साहिबाबाद व दुहाई डिपो के बीच 17 किलोमीटर का प्राथमिक सेक्शन देश को समर्पित हुआ।
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नमो भारत कोच के अंदर की तस्वीर। जागरण
पीएम मोदी ने किया था उद्घाटन
वहीं, छह मार्च 2024 को मोदी नगर नॉर्थ तक एक और 17 किमी का सेक्शन खुला, जिसे 18 अगस्त 2024 को आठ किमी आगे मेरठ साउथ तक बढ़ाया गया। पांच जनवरी 2025 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली में साहिबाबाद और न्यू अशोक नगर के बीच 13 किमी सेक्शन का उद्घाटन किया और नमो भारत ट्रेनें दिल्ली पहुंचीं।
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वहीं, प्राथमिक सेक्शन शुरू होने के 28 महीने बाद 22 फरवरी को न्यू अशोक नगर से सराय काले खां के बीच पांच किमी सेक्शन और मेरठ साउथ से मोदीपुरम के बीच 21 किमी सेक्शन शुरू होने के साथ ही नमो भारत कॉरिडोर पूरा हो जाएगा।
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नमो भारत कॉरिडोर की मुख्य बातें
[*]30,274 करोड़ रुपये है कुल लागत
[*]82.15 किलोमीटर है कुल लंबाई
[*]70 किलोमीटर एलिवेटेड (दिल्ली में 9.22 किमी व उत्तर प्रदेश में 60.57 किमी)
[*]12 किलोमीटर अंडरग्राउंड (दिल्ली में पांच किमी व उत्तर प्रदेश में सात किमी)
[*]14 किलोमीटर हिस्सा दिल्ली में
[*]68 किलोमीटर हिस्सी उत्तर प्रदेश में
[*]02 मेंटीनेंस डिपो (दुहाई और मोदीपुरम)
[*]55 किमी कॉरिडोर चालू (न्यू अशोक नगर व मेरठ साउथ के बीच)
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नमो भारत ट्रेनों की विशेषताएं
[*]हर डिब्बों में आड़ी दो बाई दो सीटें, आरामदायक सफर के लिए ग्रैब हैंडल, ओवरहेड लगेज रैक, मोबाइल व लैपटॉप चार्जिंग सॉकेट।
[*]डबल-ग्लेज्ड, टेम्पर्ड बड़ी सेफ्टी ग्लास खिड़कियां।
[*]पब्लिक अनाउंसमेंट और डिस्प्ले सिस्टम, डायनामिक रूट मैप डिस्प्ले और एक इंफोटेनमेंट डिस्प्ले के साथ-साथ इमरजेंसी कम्युनिकेशन सुविधाओं से लैस।
[*]सीसीटीवी, फायर और स्मोक डिटेक्टर, अग्निशामक यंत्र और डोर इंडिकेटर।
[*]जरूरत के हिसाब से दरवाजे खोलने के लिए पुश बटन। इससे हर स्टेशन पर सभी दरवाजे खोलने की जरूरत नहीं।
[*]हर ट्रेन में एक प्रीमियम कोच होता है।
[*]महिलाओं के लिए हर ट्रेन में एक कोच रिजर्व।
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कुल 16 नमो भारत स्टेशन
जंगपुरा (एलिवेटेड)
सराय काले खां (एलिवेटेड)
न्यू अशोक नगर (एलिवेटेड)
आनंद विहार (अंडरग्राउंड)
साहिबाबाद (एलिवेटेड)
गाजियाबाद (एलिवेटेड)
गुलधर (एलिवेटेड)
दुहाई (एलिवेटेड)
दुहाई डिपो (ग्रेड पर)
मुरादनगर (एलिवेटेड)
मोदी नगर साउथ (एलिवेटेड)
मोदी नगर नॉर्थ (एलिवेटेड)
मेरठ साउथ (एलिवेटेड)
शताब्दी नगर (एलिवेटेड)
बेगमपुल (अंडरग्राउंड)
मोदीपुरम (एलिवेटेड)
डीएमआरसी व नमो भारत लंदन और हांगकांग को देंगे मात
मल्टी-मॉडल इंटीग्रेशन: नमो भारत स्टेशनों को एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, इंटर-स्टेट बस टर्मिनस, दिल्ली मेट्रो स्टेशन और एक्सप्रेसवे जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट के अलग-अलग तरीकों के साथ, जहां भी हो सके इंटीग्रेट किया गया है। इससे यात्रियों को एक मोड़ से दूसरे मोड़ पर आसानी से आने-जाने में आसानी होती है। इसे दिल्ली मेट्रो की सभी 7 लाइनों के साथ इंटीग्रेट किया जाएगा, जहां भी वे आपस में जुड़ी होंगी।
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एक ओर जहां नमो भारत रीजनल ट्रांसपोर्ट के लिए बैकबोन का काम करेगा, वहीं दिल्ली मेट्रो लाइनें फीडर और डिस्पर्सल सर्विस देकर इसे सहयोग करेंगी। पूरा होने के बाद डीएमआरसी और नमो भारत नेटवर्क समेत दिल्ली के मास ट्रांजिट सिस्टम की लंबाई 743 किलोमीटर होगी, जो लंदन क्रॉस रेल, हांगकांग एमटीआर व पेरिस आरईआर की लंबाई से ज्यादा है।
एक ही ट्रैक पर मेरठ मैट्रो के साथ दौड़ेगी नमो भारत
मेरठ मेट्रो की सर्विस उन्हीं ट्रैक और इंफ्रास्ट्रक्चर पर दी जाएंगी जिन पर सेमी-हाई-स्पीड नमो भारत ट्रेनें चलती हैं। इससे यात्रियों को बिना किसी परेशानी के एक ट्रेन से दूसरी ट्रेन में तेज़ी से बदलने में मदद मिलेगी और यात्रा का अनुभव आरामदायक होगा। 135 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड और 120 किमी प्रति घंटे की मैक्सिमम ऑपरेशनल स्पीड के साथ मेरठ मेट्रो देश का सबसे तेज मेट्रो सिस्टम होगा।
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मेरठ मेट्रो का कोच। जागरण
मेरठ मेट्रो में 23 किलोमीटर के दायरे में 13 स्टेशन होंगे और यह मेरठ में नमो भारत नेटवर्क पर चलेगी। इनमें से चार स्टेशन यानी मेरठ साउथ, शताब्दी नगर, बेगमपुल व मोदीपुरम नमो भारत और मेरठ मेट्रो दोनों सर्विस देंगे।
रिन्यूएबल एनर्जी के लिए एमओयू
परियोजना में सोलर पावर, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, रीजेनेरेटिव ब्रेकिंग (30 प्रतिशत ऊर्जा बचत) और 110 मेगावाट सोलर प्लांट जैसी हरित पहल शामिल हैं। साहिबाबाद और गुलधर स्टेशन को आइजीबीसी से नेट जीरो एनर्जी रेटिंग मिली है। रिन्यूएबल एनर्जी के लिए एसईसीआई (सोलर एनर्जी कार्पोरेशन ऑफ इंडिया) के साथ किया एमओयू।
एनसीआरटीसी ने इंटीग्रेटेड रियल-टाइम एंटरप्राइज एसेट मैनेजमेंट सिस्टम भी लागू किया है, जो इसे अपने अलग-अलग तरह के एसेट्स से जुड़े किसी भी रिस्क या कमी का अंदाज़ा लगाने, पहचानने, ठीक करने या हटाने में मदद करता है। इससे यात्रियों की सुरक्षा पक्की होती है।
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मेरठ के बेगमपुल स्टेशन के भीतर का दृश्य। जागरण
मेक इन इंडिया के तहत नमो भारत और मेरठ मेट्रो के लिए शतप्रतिशत ट्रेनसेट गुजरात में एल्सटॉम के सावली प्लांट में बन रहे। नमो भारत के लिए सभी 30 छह-कार ट्रेनसेट (180 कोच) और मेरठ मेट्रो के लिए 10 तीन-कार ट्रेनसेट (30 कोच) किए गए हैं डिलीवर।
\“\“वन इंडिया-वन टिकट\“\“ पहल के तहत यात्री नमो भारत या दिल्ली मेट्रो में से किसी भी सिस्टम के मोबाइल ऐप का इस्तेमाल कर टिकट बुक कर सकते हैं।
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सराय काले खां स्टेशन का प्लेटफार्म नंबर दो व तीन। जागरण
सराय काले खां स्टेशन की खास बातें
[*]सराय काले खां स्टेशन सबसे बड़े मल्टी मॉडल हब के रूप में तैयार किया गया है। यहां दिल्ली-मेरठ के साथ ही नमो भारत ट्रेन के प्रस्तावित दिल्ली-करनाल व दिल्ली-अलवर रूट भी मिलेंगे। इसे रेलवे और डीएमआरसी से भी जोड़ा गया है।
[*]सराय काले खां स्टेशन में पांच प्रवेश-निकास द्वार, 14 लिफ्ट, 18 एस्केलेटर और कई सीढ़ियां हैं। स्टेशन में सभी लिफ्ट और एस्केलेटर, प्लेटफार्म स्क्रीन डोर्स (पीएसडी) लगाए जा चुके हैं।
[*]यहां हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन, मेट्रो की पिंक लाइन, वीर हकीकत राय आईएसबीटी और रिंग रोड को भी जोड़ा गया है।
[*]स्टेशन को हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से जोड़ने के लिए 280 मीटर लंबा फुटओवर ब्रिज बनाया गया है। इसमें छह ट्रैवलेटर लगे हैं।
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