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50% से 18% और अब 10% के बीच झूल रहे हैं भारतीय निर्यातक, भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में होंगी नई चुनौतियां?

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भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में नई चुनौतियां (फाइल फोटो)



जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ट्रंप प्रशासन के टैरिफ व्यवस्था रद तो हो गई है लेकिन इससे भारत-अमेरिकी कारोबारी वार्ता के लिए नई जटिलता पैदा हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 150 दिनों के लिए सभी देशों पर 10 फीसद का अस्थायी आयात शुल्क लगाने का नया प्रोक्लेमेशन जारी किया है।

ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 की तहत उठाए गये इस कदम से भारत व अमेरिका के बीच कारोबारी संबंधों को लेकर जारी अनिश्चितता और बढ़ती नजर आ रही है। मोटे तौर पर इस आदेश के बाद भारत पर लागू आयात शुल्क की मौजूदा दर 18 फीसद से 10 फीसद रह गया है, जो राहत जैसा प्रतीत होता है। लेकिन वास्तविक स्थिति इससे अधिक जटिल है।
150 दिनों के लिए अस्थायी आदेश

समस्या यह है कि यह आदेश अस्थायी है और 150 दिनों के लिए लागू किया गया है। इसके अतिरिक्त कई उत्पादों के आयात को लेकर स्पष्टता नहीं है यानी कौन-सा उत्पाद छूट की श्रेणी में आएंगे, किन पर अतिरिक्त जांच या सेक्शन 301 जैसी कार्रवाई हो सकती है, यह अभी अस्पष्ट है।

ऐसे में अगले हफ्ते भारत व वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों के बीच होने वाली वार्ता का माहौल भी अनिश्चित ही रहेगा। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी इस बारे में अधिक स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं, तभी वह वार्ता की मेज पर अपनी रणनीति को अंतिम रूप दे सकेंगे।
कुछ क्षेत्रों को अस्थायी शुल्क से छूट

व्हाइट हाउस की तरफ से शुक्रवार देर रात में जारी आदेश में कुछ क्षेत्रों को अस्थायी शुल्क से छूट दी गई है, जिनमें फार्मास्यूटिकल्स, कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स, कुछ ऑटो पार्ट्स, एयरोस्पेस उत्पाद, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज शामिल हैं।

भारत का अमेरिका को बड़ा निर्यात फार्मा क्षेत्र से जुड़ा है। इस क्षेत्र को छूट मिलना भारतीय कंपनियों के लिए बड़ी राहत है। आईटी और सेवाएं इस आदेश के दायरे में नहीं हैं, इसलिए वे सीधे प्रभावित नहीं होंगी। इसी तरह से भारतीय आटोमोबाइल उद्योग के लिए फिलहाल यह राहत है।

क्योंकि कई तरह के ऑटो पार्टस के निर्यात पर अब अमेरिका में कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा, 10 फीसद भी नहीं। टेक्सटाइल, लेदर, गार्मेंट्स आदि सेक्टर को अब 10 फीसद टैक्स देना पड़ेगा जो 18 फीसद देना पड़ रहा था। यह इनके लिए सकारात्मक ही है। साथ ही इलेक्ट्रोनिक कंपोनेंट्स निर्यातकों को भी फिलहाल राहत मिलेगी।
ट्रंप ने लगाया था 50 प्रतिशत टैरिफ

भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ महीनों से कारोबारी शुल्क को लेकर तनाव बना हुआ है। राष्ट्रपति ट्रंप पहले भारत पर 50% तक का आयात शुल्क लगाया था। इसमें 25 फीसद का टैक्स रूस से तेल खरीदने के लिए जुर्माने के तौर पर लगाया गया।

इस महीने की शुरुआत में ही पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच टेलीफोन पर बात हुई और टैरिफ को घटा कर 18% करने की घोषणा हुई। अंतरिम कारोबारी समझौता करने के लिए नया मसौदा जारी किया गया।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के कुछ घंटे पहले ही नई दिल्ली में अमेरिकी राजूदत सर्जियो गोर ने दोनों देशों के बीच अगले सप्ताह व्यापार समझौते को लेकर महत्वपूर्ण वार्ता की जानकारी दी। वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी कहा कि आगामी वार्ता से द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को जल्दी से सामान्य किया जा सकेगा। लेकिन अब स्थिति फिर से पहले जैसी ही अस्पष्ट है।

जानकारों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन का नया आदेश (10 फीसद का आयात शुल्क) अब भारतीय वार्ताकारों को अमेरिका के सामने यह पेशकश करने के लिए प्रोत्साहित करेगा कि भारतीय उत्पादों पर 10 फीसद आयात शुल्क की व्यवस्था ही जारी रहे। यानी अभी जो अस्थाई राहत है वह स्थाई तौर पर स्थापित हो। फार्मा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की छूट बरकरार रहे। निर्यात आधारित उद्योगों के लिए दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित की जाए।

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