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Census 2026: झारखंड में 1 अप्रैल से शुरू होगी डिजिटल जनगणना, गलत जानकारी देने पर 3 साल तक की सजा

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देशभर में शुरू होगी जनगणना। फोटो एआई जनरेटेड



जागरण संवाददाता, मेदिनीनगर (पलामू)। देशभर में पहली बार डिजिटल माध्यम से जनगणना कराई जाएगी। इसमें भाग लेना हर नागरिक के लिए कानूनी रूप से अनिवार्य है। जनगणना अधिनियम 1948 (संशोधित नियम 1990) के तहत जानकारी देने से इनकार या गलत सूचना देने पर तीन साल तक की जेल, एक हजार रुपये तक जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।

जनगणना दो चरणों में होगी। पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक चलेगा, जिसमें मकान और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े 33 प्रश्न पूछे जाएंगे। दूसरा चरण फरवरी 2027 से शुरू होगा, जिसमें नाम, उम्र, लिंग, धर्म और जाति जैसी व्यक्तिगत जानकारी दर्ज की जाएगी।

हर 1000 लोगों पर एक सरकारी प्रगणक तैनात रहेगा, जो मोबाइल एप के जरिए घर-घर जाकर ऑफलाइन डेटा संग्रह करेगा और बाद में उसे ऑनलाइन अपलोड किया जाएगा। प्रगणकों को तहसीलदार द्वारा जारी पहचान पत्र दिया जाएगा।

सरकार के अनुसार, नागरिकों की जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी। इसके लिए बेंगलुरु, लखनऊ और नई दिल्ली में डेटा सेंटर स्थापित किए गए हैं। डेटा तक केवल अधिकृत अधिकारी ही पहुंच सकेंगे।
आपके लिए जरूरी बातें


[*]जनगणना कैसे होगी?



प्रगणक मोबाइल एप के माध्यम से घर-घर जाकर डेटा संग्रह करेंगे। डेटा ऑफलाइन एकत्र कर ऑनलाइन एप के जरिए रियल टाइम अपलोड किया जाएगा।


[*]प्रगणक की पहचान कैसे होगी?



प्रगणक सरकारी कर्मचारी होंगे। संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार द्वारा निर्धारित प्रारूप का आईडी कार्ड जारी किया जाएगा। जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों को अतिरिक्त मानदेय भी मिलेगा।


[*]जानकारी देना क्यों अनिवार्य है?



जनगणना के लिए तय 33 सवालों और मकान सूचीकरण से जुड़े प्रश्नों के जवाब देना हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य है। जनगणना अधिनियम 1948 एवं नियम 1990 की धारा 11 के तहत जानकारी देना कानूनी बाध्यता है।


[*]गलत जानकारी देने पर क्या होगा?



यदि कोई व्यक्ति गलत सूचना देता है, तो जनगणना अधिनियम के तहत उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की कैद, एक हजार रुपए तक जुर्माना या दोनों सजा का प्रावधान है।


[*]डिजिटल डेटा कितना सुरक्षित रहेगा?



सरकार के अनुसार, एकत्रित जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रखी जाएगी और किसी व्यक्ति विशेष से साझा नहीं की जाएगी। इसके लिए बेंगलुरु, लखनऊ और नई दिल्ली में तीन डेटा सेंटर स्थापित किए गए हैं।


[*]डेटा कौन देख सकेगा?



यह डेटा केवल संबंधित क्षेत्र के अधिकृत अधिकारी ही देख सकेंगे। आम नागरिकों को इसका एक्सेस नहीं दिया जाएगा।

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