ओडिशा के हर व्यक्ति पर 27,625 रुपये का कर्ज, 60 हजार करोड़ रुपये और लेने की तैयारी में सरकार
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/21/article/image/Odisha-Assembly-(2)-1771640108148_m.webpओडिशा विधानसभा। फाइल फोटो
शेषनाथ राय, भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार पर कर्ज का बोझ साल-दर-साल बढ़ता जा रहा है। इसका सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। वर्ष 2026-27 के बजट के अनुसार राज्य के प्रत्येक नागरिक पर औसतन 27,625 रुपये का ऋण है। पिछले वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा 25,668 रुपये प्रति व्यक्ति था।
बजट दस्तावेजों के मुताबिक, 2026-27 में राज्य सरकार 60,800 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेगी। यह राशि 2024-25 में लिए गए 34,495 करोड़ रुपये और 2025-26 के 47,400 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी अधिक है। सरकार अगले वित्तीय वर्ष में पिछले साल की तुलना में 27.84 प्रतिशत अधिक ऋण लेगी।
खुले बाजार से 40 प्रतिशत कर्ज लेगी सरकार
बजट के अनुसार, कुल कर्ज का 40 प्रतिशत खुले बाजार से लिया जाएगा। वहीं 22 प्रतिशत सरकारी खातों से, 15 प्रतिशत एसएससीआई से, 13 प्रतिशत नाबार्ड और आरईसी से, 8 प्रतिशत ओएमबीडीसी और काम्बा से, जबकि 2 प्रतिशत केंद्र सरकार से ऋण लेने का प्रावधान है।
राज्य का कुल ऋण बढ़कर 1,55,710 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जो राज्य के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 14.1 प्रतिशत होगा। बीते वित्तीय वर्ष में यह अनुपात 12.7 प्रतिशत था। आंकड़े बताते हैं कि राज्य की अर्थव्यवस्था के मुकाबले कर्ज का अनुपात लगातार बढ़ रहा है।
2024-25 में राज्य पर कुल ऋण 1,25,550 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 1,34,914 करोड़ रुपये हो गया। बजट अनुमान के अनुसार आगामी वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा डेढ़ लाख करोड़ रुपये से भी आगे निकल जाएगा।
ब्याज के भुगतान में 8,200 करोड़ रुपये खर्च होंगे
बजट में यह भी बताया गया है कि सरकार को ब्याज भुगतान के रूप में 8,200 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे, जो जीएसडीपी का 3.3 प्रतिशत है। वहीं राजकोषीय घाटा 38,800 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो जीएसडीपी का 3.5 प्रतिशत होगा।
इससे पहले 2025-26 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 34,200 करोड़ रुपये (जीएसडीपी का 3.2 प्रतिशत) तय किया गया था। हालांकि सरकार का दावा है कि उसने वित्तीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (एफ आर बी एम) अधिनियम के प्रावधानों का पालन किया है, लेकिन बढ़ते कर्ज के आंकड़े आने वाले वर्षों में वित्तीय चुनौतियों की ओर इशारा कर रहे हैं।
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