रामनगरी में खुलेगा एक और आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, प्रतिनिधिमंडल ने किया अयोध्या का भ्रमण
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/20/article/image/73220290-1771607033044-1771607043436_m.webpश्रीगुरु वशिष्ठ गुरुकुल में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के सदस्यों के अभिनंदन कार्यक्रम के बाद निदेशक डा. दिलीप सिंह।
प्रवीण तिवारी, अयोध्या। जिले में एक और आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज की स्थापना की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस सिलसिले में गत दिनाें केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली का प्रतिनिधिमंडल यहां पहुंचा। दल के सदस्यों ने श्रीगुरु वशिष्ठ गुरुकुल विद्यालय में निदेशक ड. दिलीप सिंह से भेंट कर गुरुकुल परिसर में इन कक्षाओं के संचालन की संभावनाओं पर चर्चा की। साथ ही अपनी आवश्यकताओं के बारे में भी जानकारी दी।
आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के लिए पांच एकड़ भूमि की आवश्यकता है। वे सारी भूमि गुरुकुल के निकट ही चाहते हैं। इस मेडिकल कॉलेज में बीएएमएस (बैचलर इन आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी) पाठ्यक्रम संचालन की योजना है। मेडिकल कॉलेज खुलने से रामनगरी में चल रहे संस्कृत शिक्षालयों के विद्यार्थियों काे इसका सीधा लाभ मिलेगा।
पांडित्य कर्म के अलावा ये छात्र चिकित्सक भी बन सकेंगे। जिले का पहला आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज रुदौली तहसील के मवई ब्लाक के मांजनपुर में निर्माणाधीन है। यहां ओपीडी सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। यहां बीएएमएस की 60 सीटों पर प्रवेश होगा।
श्रीगुरु वशिष्ठ गुरुकुल के कोषाध्यक्ष अवध विवि के सेवानिवृत्त पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो. आरके सिंह ने बताया कि टीम ने भ्रमण कर गुरुकुल परिसर को देखा।
डॉ. दिलीप सिंह ने बताया कि मेडिकल कॉलेज खुलने के बाद इसमें संस्कृत शिक्षा में 10वीं उत्तीर्ण विद्यार्थियों के लिए डेढ़ वर्ष का प्राथमिक कोर्स संचालित होगा। इसे उत्तीर्ण करने वाले छात्र बैचलर इन आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी में प्रवेश पा सकेंगे।
डॉ. दिलीप सिंह कहते हैं कि इस संस्थान के खुल जाने पर यहां आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का प्रचार प्रसार होगा। साथ ही लोगों को इसका लाभ भी मिलेगा।
रामनगरी में इस चिकित्सा के बड़े चिकित्सालय की जरूरत महसूस की जा रही है। साथ ही यहां पर आयुर्वेदिक अस्पताल में ओपीडी और पंचकर्म सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।
केंद्रीय विवि से आए प्रतिनिधि मंडल के एक सदस्य ने बताया कि नये सत्र से नासिक के अलावा अयोध्या में मेडिकल कॉलेज संचालित करना चाहते हैं। उधर कई फार्मेंसी कॉलेज के संचालक भी अपने अपने कॉलेज में आयुर्वेदिक कक्षाओं के संचालन को तैयार हैं।
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