इटावा में ‘मोहम्मद गोरी के सेनापति की मजार’ पर बड़ा मोड़, नहीं मिले भू-स्वामित्व के साक्ष्य
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/20/article/image/Mazar-of-Muhammad-Ghori-commander-in-Etawah-1771604520581_m.webpफिशर वन फोरेस्ट में बनी मजार। जागरण आर्काइव
जागरण संवाददाता, इटावा। फिशर वन फोरेस्ट की संरक्षित वन भूमि में मोहम्मद गोरी के सेनापति शमशुद्दीन की वर्षाें पुरानी मजार होने का दावा करने वाला पक्ष ने शुक्रवार को रमजान के पाक महीने का हवाला देते हुए अतिरिक्त समय दिए जाने की मांग की है। जिला वन अधिकारी विकास नायक के न्यायालय से साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए 20 फरवरी तक का समय दिया गया था। जिला वन अधिकारी विकास नायक के शुक्रवार को जनपद से बाहर होने के कारण उनको समय दिए जाने का फैसला नहीं हो सका और इसे आगे के लिए टाल दिया गया।
मजार के सदर फजले इलाही की तरफ से जिला वन अधिकारी कार्यालय में यह प्रार्थना पत्र दिया गया कि रमजान का पाक महीना चल रहा है। ऐसी स्थिति में उन्हें रमजान के बाद का कोई समय दिया जाए। इसी तरह से गुलशेर अहमद की तरफ से भी रमजान के बाद का समय देने का अनुरोध किया गया। 16 फरवरी को सुनवाई के बाद जिला वन अधिकारी विकास नायक ने पक्षकारों को मजार वाली जगह के स्वामित्व से संबंधित कागजात अथवा साक्ष्य 20 फरवरी तक उपलब्ध कराने का समय दिया गया था।
शुक्रवार को जिला वन अधिकारी लखनऊ में मीटिंग में गए हुए थे। इसलिए दोनों प्रार्थना पत्र उनके कार्यालय में प्राप्त कराए गए हैं। वन विभाग ने वन भूमि का नक्शा, अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कार्यालय और राजस्व विभाग की रिपोर्ट मजार के सदर फजले इलाही के अधिवक्ता को प्राप्त करा दी है। वन विभाग की संरक्षित भूमि पर बनी इस मजार के नाम भूमि होने का कोई प्रमाण अभी तक नहीं मिल सका है। इस आधार पर 23 जनवरी को जिला वन अधिकारी न्यायालय में ध्वस्तीकरण का वाद दायर हुआ है। इस मामले की पहली सुनवाई 5 फरवरी को की गई थी।
पक्षकारों ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। न्यायालय ने जवाब दाखिल करने के लिए 16 फरवरी तक का समय दिया। इसके बाद फिर समय मांगा तो उन्हें 20 फरवरी तक कागजात देने की मोहलत दी गई थी।
वन रेंज अधिकारी बढ़पुरा अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि प्रतिवादी गणों की तरफ से प्रार्थना पत्र कार्यालय में प्राप्त कराए गए हैं। इस बारे में प्राधिकृत अधिकारी एवं जिला वन अधिकारी के वापस आने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। अगली तिथि का फैसला जिला वन अधिकारी द्वारा लिया जाएगा।
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