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एनसीआर में 46 नए एयर क्वालिटी सेंटर को मंजूरी, बढ़ेगा प्रदूषण पर नियंत्रण; बारिश की फुहारों से सुधरेगी हवा

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विस्तार के बाद दिल्ली और एनसीआर में केंद्रों की संख्या 157 हो जाएगी, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर प्रदूषण की निगरानी और भी प्रभावी होगी।



राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। वायु गुणवत्ता की सटीक निगरानी के लिए सीएक्यूएम ने 46 नए वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र स्थापित करने की मंजूरी दी है। इनमें से 14 दिल्ली में, 16 हरियाणा में, एक राजस्थान में और 15 उत्तर प्रदेश में लगाए जाएंगे। इस विस्तार के बाद दिल्ली और एनसीआर में केंद्रों की संख्या 157 हो जाएगी, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर प्रदूषण की निगरानी और भी प्रभावी होगी।

इसी बीच दिल्ली में अगले सात दिनों तक तापमान में बढ़ोतरी जारी रहेगी, अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। सोमवार को हल्के बादल छाए रहेंगे, जबकि सुबह हल्का कोहरा रहेगा। ऐसे में बारिश की फुहारों से प्रदूषण में कमी आने की संभावना है।
भविष्य की योजनाओं की समीक्षा

दिल्ली और एनसीआर में प्रदूषण की रोकथाम को लेकर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की 27वीं पूर्ण बैठक शुक्रवार को अध्यक्ष राजेश वर्मा की अध्यक्षता में की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक में प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए और भविष्य की योजनाओं की समीक्षा की गई।
प्रदूषण के स्रोतों का गहन विश्लेषण

बैठक के दौरान सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर आईआईटी और विभिन्न अनुसंधान संस्थानों के 33 विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई एक विस्तृत रिपोर्ट पर चर्चा की गई। 2015-2025 के बीच किए गए \“\“सोर्स अपोर्शनमेंट\“\“ (प्रदूषण के स्रोतों का निर्धारण) अध्ययनों के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ है कि दिल्ली के एक्यूआइ को प्रभावित करने वाला सबसे प्रमुख प्रदूषक पीएम 2.5 है।
रिपोर्ट में हुआ खुलासा

[*]सर्दियों में : पीएम 2.5 के मुख्य स्रोत सेकेंडरी पार्टिकुलेट (27 प्रतिशत), परिवहन (23 प्रतिशत), बायोमास जलाना (20 प्रतिशत) और धूल (15 प्रतिशत) हैं।
[*]गर्मियों में : धूल (27 प्रतिशत) सबसे बड़ा कारक बनकर उभरती है, जिसके बाद परिवहन (19 प्रतिशत) का स्थान है।

सख्त नियम और नए निर्देश

आयोग ने उद्योगों के लिए पीएम उत्सर्जन के कड़े मानकों को मंजूरी दी है। साथ ही, निर्माण और विध्वंस (सीएंडडी) कचरे के प्रबंधन और धूल नियंत्रण के लिए नए प्रोटोकाल भी जल्द जारी किए जाएंगे। गेहूं की पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए \“\“राज्य कार्य योजनाओं\“\“ के समयबद्ध कार्यान्वयन के निर्देश भी दिए गए हैं।
यातायात और टोल प्लाजा पर फोकस

सड़क जाम से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए, आयोग ने एमसीडी टोल प्लाजा पर आरएफआईडी और एएनपीआर तकनीकों से लैस \“\“बैरियर-फ्री मल्टी-लेन फ्री फ्लो\“\“ (एमएलएफएफ) सिस्टम को जल्द लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

बैठक में डाॅ. एसडी अत्री को तकनीकी सदस्य के रूप में पुनर्नियुक्ति की जानकारी भी दी गई। अध्यक्ष ने सभी एजेंसियों को सख्त सतर्कता बरतने और प्रवर्तन कार्य बल (ईटीएएफ) के माध्यम से प्रभावी कार्रवाई जारी रखने का निर्देश दिया।

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