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दृष्टिहीनों के लिए वरदान बना स्मार्ट AI चश्मा: किताब पढ़ने से लेकर रास्ता बताने तक में करेगा मदद

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एआई स्मार्ट चश्मा



दुर्गेश शुक्ल, जागरण सीतापुर। दृष्टिहीन के लिए कृत्रिम बुद्धि (एआई) का स्मार्ट चश्मा वरदान बनेगा। यह चश्मा उन्हें किताब पढ़कर सुनाएगा और रास्ता भी बताएगा। आंख अस्पताल की ओर से शनिवार को दिल्ली, फरुखाबाद, हरदोई और लखीमपुर खीरी से सात लोगों को निश्शुल्क चश्मा देने के लिए बुलाया है।

यह एआई चश्मा मोबाइल से चलता है। चश्मे में लगे कैमरे और सेंसर जहां आंखों का काम करते हैं वहीं, मोबाइल दिमाग का। चश्मा से प्राप्त सूचनाओं को मोबाइल वाइस मैसेज में बदल देता है। डॉ. मधु मिश्र ने बताया दृष्टिहीन के कदम बढ़ाते ही सेंसर और कैमरा सक्रिय हो जाते हैं। एक कदम आगे की फोटो लेकर संबंधित को रास्ते के बारे में जानकारी चश्मा बताता रहता है।

जैसे अगर आगे खंभा या फिर दीवार है तो चश्मा इसकी जानकारी दे देगा। इसके अलावा हिंदी हो या फिर अंग्रेजी चश्मा बहुत ही आसानी से पढ़कर सुना देता है। चश्मा के संचालन के लिए नेटवर्क और डेटा होना आवश्यक रहता है।

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रुपये की कराएगा पहचान

डॉ. मधु ने बताया कि चश्मा नेत्रहीन को व्यक्ति को रुपयों की पहचान करके भी बताएगा। हाथ में कितने रुपये की नोट है, इसकी जानकारी दे देगा। इसके अलावा इससे ऑनलाइन पेमेंट भी किया जा सकेगा।

चश्मा की कीमत 50 हजार रुपये

यह चश्मा रडार सिस्टम पर काम करता है। इसकी तकनीक थोड़ी महंगी। ऐसे में निर्माता कंपनी इसे 50 हजार रुपये में बेच रही है। चिकित्सकों ने बताया कि अभी इस तरह के चश्मा बनाने वाली बहुत कम कंपनियां हैं। भविष्य में बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी तो कीमतों में कमी आ जाएगी।

चश्मा में बैट्री बैकअप का सकंट

सेंसर और कैमरा चलाने के लिए चश्मा में बैट्री लगी है। बैट्री काफी छोटी है। इसका बैकअप सिर्फ दो घंटे का है। चिकित्सकों का कहना है इस तरह के चश्मा बनाने की अभी शुरुआत हुई है। आने वाले दिनों में इसका समाधान तलाश लिया जाएगा।


एआई स्मार्ट चश्मा दृष्टिहीनता की समस्या के समाधान में क्रांतिकारी कदम है। शनिवार को आंख अस्पताल में विभिन्न जिलों के सात लोगों को निश्शुल्क चश्मा दिए जाएंगे। यह चश्मा रास्ता बताने के साथ किताब पढ़कर भी सुनाएगा।


                                                          डॉ. श्रीकांत वाइकर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी-आंख अस्पताल।
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