HC ने खारिज की डिप्लोमा इंजीनियरों की अपील: केदारनाथ धाम में ड्यूटी को बताया सही, कहा- सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/21/article/image/download-1771631191579_m.webpजागरण संवाददाता, नैनीताल। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को चुनौती देती डिप्लोमा इंजीनियरों की अपील खारिज करते हुए केदारनाथ धाम यात्रा में लगाई गई ड्यूटी को सही ठहराया है।
कोर्ट ने कहा कि केदारनाथ धाम यात्रा की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करे। सरकार के पास यह अधिकार है कि आवश्यकतानुसार अपने कर्मचारियों को विशिष्ट ड्यूटी पर तैनात करे। स्पष्ट किया कि सरकारी कर्मचारियों को सेवा की अनिवार्यता और जनहित के अनुसार सौंपे गए कर्तव्यों का पालन करना होगा।
उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि लोक निर्माण विभाग और सिंचाई विभाग में कार्यरत हैं। संघ का कहना था कि वह डिप्लोमा इंजीनियर, जो तकनीकी विशेषज्ञ हैं, उन्हें स्वच्छता जैसे कार्यों में लगाया जा रहा है। यह उनके कार्यक्षेत्र और अनुभव से बाहर है।
उनकी यह याचिका पूर्व में एकलपीठ ने खारिज कर दी थी। जिसे उन्होंने खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी थी। खंडपीठ ने डिप्लोमा इंजीनियरों के दावों की गहराई से जांच की और पाया कि पांच अप्रैल 2023 के सरकारी आदेश के अनुसार इंजीनियरों को स्वच्छता कार्य नहीं सौंपा गया है।
वास्तव में उन्हें यात्रा मार्ग पर भूस्खलन को रोकने और पैदल मार्गों की मरम्मत जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी कार्यों की जिम्मेदारी दी गई है। ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। खंडपीठ ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि स्वच्छता और अन्य संबंधित कार्यों के लिए सुलभ इंटरनेशनल, नगर निकायों और नगर पालिकाओं के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है।
अपीलकर्ता अदालत के समक्ष ऐसा कोई भी प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके जिससे यह साबित हो सके कि किसी भी डिप्लोमा इंजीनियर को स्वच्छता कार्य में लगाया गया है।
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