यात्रियों की जान जोखिम में डालकर 4 साल दौड़ती रही लखनऊ मेट्रो, CAG रिपोर्ट ने खोली सुरक्षा और अनियमितताओं की पोल
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/21/article/image/lucknow-metro-1771628769915_m.webpनिशांत यादव, जागरण लखनऊ। नार्थ-साउथ कॉरिडोर पर मेट्रो यात्रियों की जान जोखिम में डालकर चार साल से दौड़ रही है। रोलिंग स्टाक के पहियों में घिसावट और उसके एडजेस्टमेंट की आवश्यकता के लिए वर्ष 2022 में ही आरडीएसओ से जांच कराकर अंतरिम गति प्रमाणपत्र का नवीनीकरण प्राप्त करना था, लेकिन यह नवीनीकरण किया ही नहीं गया।
मेट्रो प्रशासन की यह लापरवाही कैग रिपोर्ट में सामने आई है। वर्ष 2025 की कैग की रिपोर्ट में लखनऊ मेट्रो में अनुबंध, सेवाओं, तकनीक सहित कई पहलुओं पर सवाल उठाए गए हैं।
रिपोर्ट बताती है कि भारतीय रेलवे मानक आइआरएस-टी-12-2009 के अनुसार डिपो क्षेत्र के लिए रेल लाइन की कठोरता 260 बीएचएन से कम नहीं होना चाहिए। आईआईटी कानपुर की एडवांस सेंटर फार मटीरियल्स साइंस की जांच रिपोर्ट में यह कठोरता 229.07 और 242.52 मिली। इसी तरह मुख्य लाइन की कठोरता का मान 340 से 390 बीएचएन होना चाहिए।
यह भी जांच में 291.78 बीएचएन और 308.79 बीएचएन रही। कैग ने कहा कि मानकों से कम कठोरता वाली रेल लाइन का उपयोग किया गया। इससे पटरियों और पहियों में शीघ्र क्षरण के कारण कंपनी के लिए रखरखाव लागत में वृद्धि हो सकती थी।
आईआईटी कानपुर ने पाया कि वर्तमान में मेट्रो संचालन के लिए जिस संचार आधारित ट्रेन नियंत्रण प्रणाली का उपयोग हो रहा है, उसमें इंटरफैरंस और जैमिंग की सुरक्षा जांच मात्र इंटेलिजेंस ब्यूरो से हो रही है।
मानक के अनुसार एक प्रमाणित साइबर सुरक्षा एजेंसी को सूचीबद्ध और सुरक्षा आडिट रिपोर्ट तैयार करना आवश्यक था। इस लापरवाही से संपूर्ण मेट्रो प्रणाली प्रभावित होकर ठप हो सकती थी।
बिना टेंडर सुरक्षा फर्म का चयन
नियम के तहत 10 लाख रुपये से अधिक के काम के लिए टेंडर होना चाहिए, लेकिन मेट्रो प्रशासन ने बिना टेंडर के मेसर्स जी4एस सिक्योर साल्यूशंस को जून 2016 में तीन वर्षों के लिए अनुबंध किया गया। हर महीने 32.72 लाख रुपये का भुगतान किया गया। यह सेवा मार्च 2023 तक जारी रही।
लागत अनुमानों से अधिक का भुगतान
जांच में पता चला है कि कार्य के एस्टीमेट की गणना ठीक से नहीं की गई है। नियम के तहत मूल लागत के अनुमानों में 15 प्रतिशत से अधिक भिन्नता आने पर स्वीकृति के लिए प्रशासनिक विभाग को प्रेषित किया जाना चाहिए। यहां एमडी ने ही भिन्नता और अतिरिक्त मदों को स्वीकृति दे दी।
इन मदों में आई लागत में भिन्नता
कार्य का नाम अनुमानित लागत अनुबंधित लागत भिन्नता वास्तविक लागत
एलकेसीसी-03
145.60
130.51
44.97
175.48
एलकेसीसी-04
95.85
85.55
25.86
111.41
एलकेसीसी-09
95.25
80.94
26.04
106.98
मानकों से अधिक मिली ध्वनि
रैपिड ट्रांजिट संस्थान, वॉशिंगटन डीसी के निर्गत मानकों के आधार पर आईआईटी कानपुर ने मेट्रो के अंदर, प्लेटफॉर्म पर, एलिवेटेड व टनल में अलग-अलग ट्रैक पर 40 किलोमीटर प्रति घंटे की समान गति पर ध्वनि परीक्षण किया। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार ध्वनि स्तर 65 से 75 डेसिबल तक अनुमन्य था, लेकिन यह 83.4 तक दर्ज की गई।
मेट्रो स्टेशन -स्थिति- -मेट्रो भाग- -स्वीकृत ध्वनि स्तर -मौजूदा ध्वनि स्तर डेसिबल में
मुंशीपुलिया
-एलिवेटेड-
स्थिर व खुले दरवाजे-भीतरी
65
76.1 से 74.9
मुंशीपुलिया
-एलिवेटेड-
स्थिर व बंद दरवाजे-भीतरी
65
76.2 से 73.5
मुंशीपुलिया से केडी सिंह स्टेडियम
-एलिवेटेड-
गतिशील-भीतरी
75
83.4 से 62.4
मुंशीपुलिया
-एलिवेटेड-
स्थिर व ओपन डोर-बाहरी
60
81.7 से 80
मुंशीपुलिया
-एलिवेटेड-
मेट्रो लीविंग प्लेटफार्म -बाहरी
75
82.4 से 79.4
हजरतगंज
-अंडरग्राउंड-
स्थिर -बाहरी
67
81.3 से 78
लक्ष्य नहीं हो सका प्राप्त
रिपोर्ट बताती है कि मार्च 2019 से संपूर्ण रूप से शुरू हुए नार्थ-साउथ कॉरिडोर के डीपीआर में यात्रियों की जो संभावित संख्या बताई गई थी, उस लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सका। डीपीआर को आधार मान लें तो दैनिक यात्रियों की संख्या में 88 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। इससे राजस्व सृजन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
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