मुजफ्फरपुर में खुलेआम बिक रहा अवैध मीट-मुर्गा, सरकार की रोक के बाद भी नियमों का हो रहा उल्लंघन
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/21/article/image/Muzaffarpur-News-(55)-1771629611267_m.webpसाहू रोड में स्कूल के गेट पर बिक रहा मटन। फोटो जागरण
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। सरकार की रोक के बाद भी शहरी क्षेत्र में तीन हजार से अधिक मीट-मुर्गा व मछली की दुकानें सड़क किनारे खुली हैं। खुले में काटकर मीट, मुर्गा व मछली बेची जा रही है।
शहर में खुली सभी मीट, मुर्गा व मछली दुकानें बिना लाइसेंस के अवैध रूप से चल रही हैं। उनको नियंत्रित करने की जिम्मेदारी नगर निगम की है, लेकिन निगम के पास न तो शहर में खुली दुकानों की कोई लिस्ट है और न ही उनको लाइसेंस देने की व्यवस्था।
मीट-मुर्गा दुकानदार खून को नालियों में बहा रहे हैं। अवशेष को सड़क किनारे फेंक रहे हैं। बिना पर्दा लगाए सड़क किनारे मीट टांगकर बेच रहे हैं। साफ-सफाई का भी खयाल नहीं रखा जा रहा है। और तो और स्कूल व धार्मिक स्थलों के पास मीट-मुर्गा व मछली की दुकान खोलने पर पूरी तरह रोक है, लेकिन यह सिर्फ कागज पर है।
हकीकत में स्कूल की दीवार से सटी दुकान चल रही हैं। उदाहरण देखना है तो साहू रोड स्थित मारवाड़ी मध्य विद्यालय को देख लें जहां स्कूल के बाहर मीट की दुकान खुली है। वैसे तो पहले से भी खुले में मीट-मुर्गा व मछली काटकर बेचने पर रोक है, लेकिन हाल ही में सरकार ने राज्य के सभी शहरी क्षेत्रों में इसपर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है।
यही नहीं एक साल पहले महापौर निर्मला देवी ने निगम अधिकारियों को शहरी क्षेत्र स्थित सभी मीट-मुर्गा दुकानों की जांच करने, बिना लाइसेंस चलने वाली दुकानों पर कार्रवाई करने, स्कूल व मंदिर के पास चल रहीं दुकानों को बंद कराने का निर्देश दिया था। अब तक उनके निर्देशों का पालन नहीं हुआ।
नहीं हो रहा नियमों का पालन
मीट-मुर्गा दुकान के लिए नियम बनाए गए हैं, लेकिन उनका पालन नहीं हो रहा। पालन तो दूर इसे देखने वाला कोई नहीं है।
मीट-मुर्गा दुकानदारों को इन नियमों का करना है पालन
[*]मीट या मुर्गे की दुकान खोलने के लिए नगर निगम से लाइसेंस लेना अनिवार्य है।
[*]दुकान के लिए ट्रेड लाइसेंस बनवाना जरूरी है।
[*]दुकान का फ़र्श पत्थर या सीमेंट का होना चाहिए।
[*]दुकान का गोदाम रोज़ाना साफ़ करना होता है।
[*]दुकान का इस्तेमाल आवासीय कामों या पशुओं के लिए नहीं किया जा सकता।
[*]मीट या मुर्गा काटने वाले औजार साफ़ रखने होते हैं।
[*]दुकान से निकले कचरे को इकट्ठा रखना होता है।
[*]दुकान को खुले में नहीं खोला जा सकता।
[*]दुकान को स्कूल या धार्मिक स्थल के पास नहीं खोला जा सकता।
[*]दुकान के सामने चिलमन लगाना जरूरी है।
[*]किसी भी पशु का वध सार्वजनिक जगह या खुले में नहीं किया जा सकता।
[*]खुले में मीट या मुर्गा बेचने या उसका कचरा फेंकने पर 5,000 रुपये तक का जुर्माना का प्रविधान है।
Pages:
[1]