भारत- अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर राहुल गांधी ने बोला हमला, बोले- डाटा उपनिवेश बनने जा रहा भारत
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/21/article/image/rahul-1771619395706_m.webpभारत- अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर राहुल गांधी ने बोला हमला (फाइल फोटो)
पीटीआई, नई दिल्ली। भारत- अमेरिका के अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला बोला है। राहुल ने दावा किया कि इस समझौते के साथ भारत\“\“ डाटा उपनिवेश\“\“ बनने जा रहा है।
राहुल गांधी ने शुक्रवार को एक्स पर वीडियो पोस्ट कर संसद में अपने हालिया भाषण का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने जिउ-जित्सु का उदाहरण दिया था। जिउ-जित्सु जापान की सैन्य कला (मार्शल आर्ट) है। यह हथियार के बिना शत्रु को पराजित करने की विद्या है।
राहुल गांधी ने पोस्ट किया, व्यापार समझौते पर संसद में अपने भाषण में मैंने जिउ-जित्सु का उदाहरण क्यों इस्तेमाल किया? अमेरिकियों को खुश करने के लिए हमारे किसानों की कुर्बानी क्यों दी गई? अमेरिका को हमारे तेल आयात तय करने देकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता क्यों किया गया?
आगे कहा कि मैंने क्यों कहा कि यह समझौता भारत को डाटा उपनिवेश बना सकता है? मोदी जी ऐसा समझौता क्यों मानेंगे, जिसमें भारत इतना कुछ दे रहा और बदले में बहुत कम मिलता दिख रहा है? इस शर्मनाक आत्मसमर्पण का जवाब प्रधानमंत्री पर डाले गए “ग्रिप्स\“\“ और “चोक्स\“\“ में छिपा है।
राहुल ने कहा, मैंने ग्रिप और चोक्स का इस्तेमाल इसलिए किया क्योंकि ये जिउ-जित्सु में प्रतिद्वंद्वी को नियंत्रित करने का यही तरीका है। लेकिन यह राजनीति में भी मौजूद हैं। राजनीति के अपने अनुभव में मैंने देखा है कि राजनीतिक ग्रिप और चोक्स ज्यादातर छिपे रहते हैं। आम आदमी उन्हें देख नहीं पाता। राहुल ने थलसेना के पूर्व प्रमुख एमएम नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक का उल्लेख कर चीन मुद्दे पर भी सरकार पर हमला बोला।
डीपफेक लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा : ओम बिरला
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने डीपफेक और भ्रामक सूचना को लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया। वह एआइ समिट में लोकतंत्र के लिए एआइ विषय पर एक विशेष सत्र को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने डीपफेक और भ्रामक सूचना की बढ़ती चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एआइ का उपयोग सत्य और विश्वसनीयता को मजबूत करने के लिए किया जाना चाहिए, न कि तथ्यों को विकृत करने या दबाने के लिए।
उन्होंने लोकतांत्रिक संवाद को हेरफेर और भ्रम से बचाने के लिए तकनीकी प्रगति के साथ-साथ मजबूत सुरक्षा उपायों को विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
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