हरियाणा राज्यसभा चुनाव के लिए रेस मे सुभाष चंद्रा- गोपाल कांडा और रूप बंसल, AAP के सुशील गुप्ता पर भी BJP की निगाह
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/20/article/image/rajyasabha_chunav_news-1771576098326_m.webpकैप्शन: हरियाणा की दो सीटों पर होना है राज्यसभा चुनाव (जागरण फाइल)
अनुराग अग्रवाल, पंचकूला। हरियाणा में करीब 10 साल पहले भाजपा के सहयोग से राज्यसभा पहुंचे सुभाष चंद्रा के चुनाव विवाद का पटाक्षेप हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके चुनाव के विरुद्ध दायर याचिका को आधारहीन बताते हुए खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने दलील दी कि सुभाष चंद्रा का कार्यकाल पूरा हो चुका है।
ऐसे में उनके निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है। भाजपा समर्थित सुभाष चंद्रा ने इनेलो समर्थित उम्मीदवार आरके आनंद को राज्यसभा के चुनाव में पराजित किया था।
आनंद को कांग्रेस ने समर्थन देने की बात कही थी, लेकिन तब बड़े ही रणनीतिक ढंग से कांग्रेस के विधायकों के 14 वोट रद हो गए थे और सुभाष चंद्रा चुनाव जीत गए थे। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सुभाष चंद्रा के हक में उस समय आया जब हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों पर एक बार फिर से चुनाव होने हैं।
2016 में चौधरी बीरेंद्र सिंह की हुई थी जीत
साल 2016 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर चौधरी बीरेंद्र सिंह की जीत हुई थी, जोकि उस समय कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए थे। तब उन्हें केंद्रीय मंत्री बनाया गया था। बीरेंद्र सिंह की अब कांग्रेस में वापसी हो चुकी है। भाजपा के मौजूदा दो राज्यसभा सदस्यों किरण चौधरी व रामचंद्र जांगड़ा का नौ अप्रैल को कार्यकाल पूरा हो रहा है।
इन दोनों सीटों पर 16 मार्च तक चुनाव होना है। पिछले राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने निर्दलीय कार्तिकेय शर्मा के लिए माहौल बनाकर उन्हें देश के सबसे बड़े सदन में पहुंचा दिया था। सुभाष चंद्रा व कार्तिकेय शर्मा की जीत के बाद इस बार होने वाले राज्यसभा के चुनाव में भी भाजपा कोई नया खेला करने की रणनीति पर काम कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट से सुभाष चंद्रा को राहत मिलने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वे दोबारा राज्यसभा चुनाव लड़ सकते हैं। सुभाष चंद्रा के साथ-साथ भाजपा नेताओं की निगाह हरियाणा लोकहित पार्टी के संयोजक एवं पूर्व गृह राज्य मंत्री गोपाल कांडा पर भी टिकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- चंद्रा कार्यकाल पूरा हो चुका, सुनवाई का औचित्य नहीं
पूर्व राज्यसभा सदस्य सुभाष चंद्रा के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे निष्फल घोषित कर निपटा दिया। न्यायालय के समक्ष यह तथ्य रखा गया कि संबंधित राज्यसभा सदस्य का छह वर्ष का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, ऐसे में अब याचिका पर निर्णय का कोई व्यावहारिक प्रभाव शेष नहीं है।
याचिकाकर्ता आरके आनंद ने आरोप लगाया था कि मतदान प्रक्रिया के दौरान पूर्व नियोजित गठजोड़ किया गया था। बैलेट पेपर पर प्रयोग किए जाने वाले स्केच पेन की अदला-बदली कर मतदान को प्रभावित किया गया।
याचिका में मतदान की वीडियोग्राफी का हवाला देते हुए चुनाव अधिकारियों और कुछ विधायकों की भूमिका पर भी प्रश्न उठाए गए थे। मामले की सुनवाई पहले पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में हुई। हाई कोर्ट ने 23 मार्च 2017 को इस याचिका को खारिज कर दिया था।
हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ आरके आनंद ने सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट में अंतिम सुनवाई के दौरान हरियाणा के पूर्व एडवोकेट जनरल और भारत सरकार के पूर्व अतिरिक्त सालिसिटर जनरल मोहन जैन ने अदालत को बताया कि संबंधित सदस्य का कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका है। ऐसे में सुनवाई को आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है।
सुशील गुप्ता को तोड़कर पंजाब में लाभ दे सकती है भाजपा
हरियाणा में आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता पर भी भाजपा की निगाह है। सुशील गुप्ता को तोड़कर भाजपा पंजाब में राजनीतिक लाभ प्राप्त कर सकती है, जबकि सुभाष चंद्रा व गोपाल कांडा के बारे में कहा जाता है कि वे विधायकों को तोड़ने की रणनीति में न केवल पारंगत हैं, बल्कि उनके पास इस बात के पुराने अनुभव भी हैं।
गोपाल कांडा अपने साम-दाम-दंड-भेद की रणनीति के चलते ही पूर्ववर्ती भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार में गृह राज्य मंत्री बने थे, जबकि भाजपा में उनकी नजदीकियां केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ बनी हुई हैं।
भाजपा राज्य में ऐसे नेताओं पर भी निगाह डाल रही है, जो उनकी पार्टी लाइन के अलावा चुनाव के खेल में हर तरह का रिस्क लेने का दम भर सकते हैं। इसके लिए एमथ्रीएम डेवलपर्स के मालिक रूप कुमार बंसल का नाम भी सामने आ रहा है।
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