प्रयागराज-गोरखपुर वंदे भारत के समय में बदलाव की मांग, खाली सीटों से यात्री परेशान
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/20/article/image/Vandebharat-1771569001733_m.webpतस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। प्रयागराज-गोरखपुर वंदे भारत का समय बदलने कर अपराह्न सवा तीन बजे की जगह सुबह छह बजे चलाने की मांग की जा रही है। यात्रियों के साथ यात्री समिति ने भी यह मांग दोहराई है। लोगों कहना है कि यह ट्रेन प्रयागराज के लोगों के लिए व्यावहारिक नहीं है। यात्रियों को लखनऊ, अयोध्या या गोरखपुर सुबह जाना होता है, लेकिन उस समय यहां से कोई भी तेजगति वाली ट्रेन मौजूद नहीं है।
प्रयागराज जंक्शन यात्री सलाहकार समिति के सदस्य उमेश चंद्र कक्कड़, सदस्य उत्तम कुमार केसरवानी ने कहा कि इस वंदे भारत में बैठने के लिए यात्री नहीं मिल पा रहे हैं, जबकि इसी रूट की दूसरी ट्रेनों में यात्रियों को सीटें नहीं मिल रही हैं। प्रयागराज-गोरखपुर वंदे भारत को सुबह छह बजे चलाया जाए, इससे यात्री मिलने लगेंगे और ट्रेन की सीटें भर जाएगी।
अभी 1264 सीटों में 650 से सीटें हर दिन खाली रहती है। गोरखपुर जाने वाले नियमित यात्री विकास कुमार का कहना है कि उन्हें व्यापार के सिलसिले में अक्सर गोरखपुर जाना पड़ता है, लेकिन दोपहर सवा तीन बजे की टाइमिंग उनके किसी काम की नहीं है।
यह शाम को गोरखपुर पहुंचाती है, जिससे पूरा दिन खराब हो जाता है। अगर यह सुबह चलती, तो हम जैसे सैकड़ों व्यापारियों को इसका सीधा लाभ मिलता। हम दोपहर में गोरखपुर पहुंच जाते और अपना काम समय से कर लेते।
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सलोरी के रहने वाले अभिषेक सिंह कहते हैं, \“हमें सुबह लखनऊ पहुंचना होता है ताकि दिन भर का काम निपटा कर वापस आ सकें। वंदे भारत की दोपहर की टाइमिंग के कारण हम सुबह जाने वाली इंटरसिटी या अन्य ट्रेनों को प्राथमिकता देते हैं।
सुबह के समय लखनऊ और गोरखपुर के लिए यात्रियों का दबाव सबसे ज्यादा होता है, लेकिन उस समय ट्रेन न चलाकर इसे दोपहर में चलाया जा रहा है। खाली सीटों की संख्या इसीलिए बढ़ रही है क्योंकि यह आम आदमी के शेड्यूल में फिट नहीं बैठती। रेलवे तो बहाना ढूंढ रहा है कि कम मांग दिखाकर वंदे भारत को बंद किया जा सके।
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