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अंबिकापुर में एसडीएम-साथियों की पिटाई से मृत बुजुर्ग के बेटे चेन्नई से लौटे, बोले- दोषियों को मिले सजा

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जेएनएन, अंबिकापुर। कुसमी एसडीएम से जुड़े विवाद और ग्रामीण रामनरेश राम की मौत की घटना ने सामरी क्षेत्र में बाक्साइट खदानों के संचालन के बाद भी रोजगार की उपलब्धता नहीं होने को भी सामने ला दिया है। अंतिम संस्कार के बाद मृतक के बेटे संजय कुमार और किशुन चेन्नई से वापस लौटे, लेकिन उनके दिल में सबसे बड़ा दर्द इस बात का है कि वे अपने पिता की अंतिम झलक भी नहीं देख सके।

परिवार का एक अन्य बेटा सिलमन पिता के साथ ही गांव में रहता था और घटना के समय वही मौजूद था।संजय और किशुन चेन्नई के नजदीक एक मछली पालन केंद्र में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। दोनों भाइयों ने बताया कि वे मेहनत मजदूरी कर जो पैसा भेजते थे, उसी से उनके पिता रामनरेश राम खेती-बाड़ी और घर का खर्च चलाते थे।

पिता की अचानक हुई मौत ने परिवार को भावनात्मक और आर्थिक दोनों रूप से झकझोर दिया है।इस घटना ने क्षेत्र में रोजगार और संसाधनों के बंटवारे पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, आसपास के क्षेत्र में बाक्साइट की कई खदानें संचालित हैं और वर्षों से यहां से उत्खनन व परिवहन जारी है, लेकिन स्थानीय युवाओं को पर्याप्त रोजगार नहीं मिल पा रहा है।

यही कारण है कि संजय और किशुन सहित आसपास के लगभग 20 युवा आज भी रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे राज्यों में काम करने को मजबूर हैं। झारखंड सीमा पर बाक्साइट के अवैध उत्खनन को ही इस घटना का मूल कारण माना जा रहा है। ग्रामीण लंबे समय से अवैध उत्खनन का विरोध कर रहे थे।

आरोप है कि गांववालों को डराने-धमकाने के प्रयास में एसडीएम और उनके साथियों ने तीन ग्रामीणों की बेरहमी से पिटाई की, जिसमें गंभीर रूप से घायल रामनरेश राम की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में आक्रोश और शोक का माहौल है।
उच्च गुणवत्ता का बाक्साइट निकल रहा अवैध खदान से

ग्रामीणों का कहना है कि जिस अवैध खदान को लेकर विवाद हुआ, वहां से उच्च गुणवत्ता का बाक्साइट निकाला जा रहा था। सरगुजांचल के अन्य खदानों से निकलने वाला बाक्साइट पत्थर आमतौर पर लाल रंग का होता है और उसमें मिट्टी का मिश्रण अधिक रहता है, जबकि छत्तीसगढ़-झारखंड सीमा पर हंसपुर के नजदीक संचालित अवैध खदान का बाक्साइट ज्यादा चमकदार बताया जा रहा है, जिससे उसमें एल्युमिना की मात्रा अधिक होने की संभावना जताई जा रही है। इसी वजह से बाहरी प्रभावशाली लोगों की नजर इस खदान पर थी और आरोप है कि एसडीएम से जुड़े कुछ युवक भी इस धंधे से जुड़े हुए थे।
रोजगार के अवसर नहीं मिलने से बाहर जा रहे युवा

रामनरेश राम की मौत ने केवल एक परिवार का सहारा नहीं छीना, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और संसाधनों पर स्थानीय अधिकार को लेकर बड़ा मुद्दा सामने लाया है। जहां एक ओर क्षेत्र की खदानों से बड़ी मात्रा में बाक्साइट बाहर भेजा जा रहा हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय युवा रोजगार के लिए भटकने को मजबूर हैं। अब ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और क्षेत्र के संसाधनों से स्थानीय लोगों को न्याय और रोजगार दोनों मिलें।
विस नेता प्रतिपक्ष ने मानवाधिकार आयोग को लिखा पत्र

विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने रामनरेश राम के मौत की घटना को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से स्वतंत्र एवं विस्तृत जांच कराने की मांग की है। डॉ. महंत ने आयोग के अध्यक्ष जस्टिस वी रामासुब्रमणियन को पत्र लिखकर कहा है कि प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान कथित रूप से अत्यधिक बल प्रयोग के कारण एक निर्दोष आदिवासी ग्रामीण की मौत हुई है। इस घटना से स्थानीय समुदाय और नागरिक समाज में आक्रोश और चिंता का माहौल है तथा प्रशासनिक जवाबदेही और मानवाधिकारों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

पत्र में उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन होगा, इसलिए निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच जरूरी है। उन्होंने आयोग से पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच शुरू करने, जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करने, दोषियों के खिलाफ कानूनी एवं प्रशासनिक कार्रवाई की सिफारिश करने तथा पीड़ित परिवार को तत्काल मुआवजा और सहयोग उपलब्ध कराने की मांग की है।

इसके साथ ही घटना में प्रभावित ग्रामीणों के उचित उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया गया है। डा महंत ने कहा कि इस मामले में त्वरित कार्रवाई से ही न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास कायम रहेगा।
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