सिकिदरी हाइडेल घोटाला: न्यायिक लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई, दोषी अधिकारी चिन्हित
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/20/article/image/jharkhand-Vidhansabha-1771546740406_m.webpराज्य ब्यूरो, रांची। सिकिदरी हाइडेल मरम्मत घोटाले में प्राक्कलन में अनियमितता से लेकर न्यायिक प्रक्रिया में लापरवाही बरतने वाले अधिकारी कार्रवाई के दायरे में होंगे। गुरुवार को जमशेदपुर पश्चिम के जदयू विधायक सरयू राय के प्रश्न के जवाब में ऊर्जा विभाग ने इसे स्वीकार करते हुए कहा है कि न्यायिक प्रक्रिया में लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है।
इसके अतिरिक्त प्राक्कलन में अनियमितता बरते वाले दोषी चिन्हित किए जा रहे हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2012 में सिकिदरी जल विद्युत परियोजना की मरम्मत भेल द्वारा कराने के मामले में अनियमितता उजागर हुई थी।
सीबीआइ ने भी इस प्रकरण की जांच कर आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। फिलहाल यह मामला स्पेशल जज, सीबीआइ कोर्ट, रांची में विचाराधीन है। परियोजना के प्रोजेक्ट मैनेजर ने परियोजना की दोनों यूनिटों की मरम्मत के लिए 4.88 करोड़ का प्राक्कलन तैयार किया था, जिसके विरुद्ध दो मार्च, 2012 को मुख्य अभियंता (उत्पादन) ने 20.87 करोड़ का कार्यादेश दे दिया।
अब अधिकारियों की लापरवाही के कारण न्यायालय ने भेल को ब्याज सहित 130 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान करने को कहा है। भेल ने संपत्ति जब्त करने के लिए आवेदन दिया, जिसपर 17 मार्च को अगली सुनवाई निर्धारित है।
ऊर्जा विकास निगम ने यह भी जानकारी दी है कि पूर्व में हुई जांच में तत्कालीन विद्युत कार्यपालक अभियंता प्रवीण कुमार और तत्कालीन वित्त नियंत्रक- दो प्रमोद कुमार को निर्दोष पाते हुए आरोप मुक्त किया जा चुका है, जबकि डीएन राम की मृत्यु हो चुकी है।
बीके चौधरी के विरुद्ध 40 प्रतिशत पेंशन कटौती और जीएनएस मुंडा के खिलाफ दो प्रतिशत अस्थायी पेंशन कटौती की कार्रवाई की गई है। इसपर निर्णय अभी लंबित है। अब ऊर्जा विभाग ने प्राक्कलन से अधिक व्यय के दोषियों और उनके विरुद्ध की गई कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया में लापरवाही के दोषियों को इंगित कर कार्रवाई करेगी।
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