नौसेनाओं के बीच सहयोग अब विकल्प नहीं, अनिवार्यता : राजनाथ सिंह
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/19/article/image/Rajnath-Singh-X-1771519857931_m.webpरक्षा मंत्री राजनाथ सिंह। (X- @rajnathsingh)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कोई भी एकल नौसेना चाहे कितनी भी सक्षम हो आतंकवाद, समुद्री डकैती और नई चुनौतियों का अकेले सामना नहीं कर सकती है। यही कारण है कि नौसेनाओं के बीच सहयोग अब एक विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्यता है।
नौसेनाओं के बीच सहयोग सामूहिक रूप से समुद्री डकैती, आतंकवाद, अवैध मछली पकड़ने, तस्करी, साइबर कमजोरियों और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान जैसी चुनौतियों का सामना करने के लिए एक अनिवार्यता बन गई है। ये विशिष्ट जिम्मेदारियां अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होकर इन चुनौतियों का प्रबंधन करने के लिए प्रेरित करती हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में मिलन-2026 के 13वें संस्करण का उद्घाटन किया, जो प्रमुख बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास की शुरुआत का प्रतीक है। रक्षा मंत्री ने 74 देशों के मेहमानों का गर्मजोशी से स्वागत कर कहा कि मिलन-2026 अब तक का सबसे बड़ा और सबसे समावेशी संस्करण है। इसके माध्यम से भारत को एक विश्वसनीय और जिम्मेदार समुद्री साझेदार के रूप में वैश्विक समुद्री समुदाय का विश्वास दर्शाता है।
जलवायु परिवर्तन प्राकृतिक आपदाओं को बढ़ा रहा है, जिससे मानवतावादी और आपदा राहत कार्य अधिक बार और अधिक मांग वाले हो रहे हैं। उन्होंने कहा, \“\“इसका उद्देश्य भागीदार देशों की नौसेनाओं के बीच इंटरआपरेबिलिटी बढ़ाना, पेशेवर अनुभव और प्रथाओं को साझा करके पेशेवर क्षमता में सुधार करना और प्रतिभागियों के बीच मित्रता गहरी करना है।
एक सच्चे विश्व-मित्र के रूप में हम क्षेत्र में रचनात्मक व विश्वसनीय भूमिका निभाते रहेंगे। हम मानते हैं कि समग्र समुद्री सुरक्षा व आपसी समृद्धि अविभाज्य है व केवल समान विचारधारा वाले देशों के बीच सहयोग, विश्वास व साझा प्रतिबद्धता से ही प्राप्त की जा सकती हैं।
समुद्री चरण 21 फरवरी से शुरू
मिलन 2026 का समुद्री चरण 21 फरवरी से शुरू होने वाला है और 25 फरवरी को समाप्त होगा। दोनों हार्बर और समुद्री चरणों का उद्देश्य भागीदार नौसेनाओं के बीच इंटरआपरेबिलिटी को बढ़ाना, समुद्री डोमेन जागरूकता को मजबूत करना और एंटी-सबमरीन युद्ध, एयर डिफेंस और खोज एवं बचाव अभियानों में उन्नत अभ्यास करना है।
यह अभ्यास मित्र विदेशी देशों की नौसेनाओं को एकत्रित करने का प्रयास करता है ताकि पेशेवर संबंधों को गहरा किया जा सके। भारतीय नौसेना द्वारा 1995 में शुरू किया गया \“मिलन\“ एक द्विवार्षिक बहुपरकारी नौसैनिक जुड़ाव है जो चार क्षेत्रीय देशों-इंडोनेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका और थाईलैंड की भागीदारी के साथ शुरू हुआ।
(समाचार एजेंसी आइएएनएस के इनपुट के साथ)
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