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Swiggy से नहीं मंगा पाएंगे 15 मिनट में स्नैक्स, कंपनी ने घाटे के चलते बंद किया धंधा; इनकी जाएगी नौकरी?

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Swiggy से नहीं मंगा पाएंगे 15 मिनट में स्नैक्स, कंपनी ने घाटे के चलते बंद किया धंधा; इनकी जाएगी नौकरी?



नई दिल्ली। लिस्टेड फूडटेक कंपनी स्विगी ने अपने स्टैंडअलोन 15-मिनट फूड डिलीवरी APP स्नैक को लॉन्च होने के एक साल से भी कम समय में बंद (Swiggy shutdown Snacc) कर दिया है। कंपनी को बिजनेस को ग्रो करने में काफी दिक्कत आ रही थी। प्रॉफिट नहीं हो रहा था। इसलिए स्विगी ने Snacc को बंद करने ही कर दिया।

SNACC बेंगलुरु और गुरुग्राम में काम कर रहा था। सूत्रों ने बताया कि इस वर्टिकल के कर्मचारियों को बिजनेस के दूसरे हिस्सों में शामिल किया जाएगा। यानी SNACC के लिए काम करने वाले कर्मचारियोंकी नौकरी नहीं जाएगी। हालांकि, इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, भेजे गए एक इंटरनल ईमेल में, स्विगी ने कहा कि SNACC के लिए प्रोडक्ट-मार्केट फिट बनना शुरू हो गया था, लेकिन बड़े इकोनॉमिक्स की वजह से बिजनेस को बढ़ाना मुश्किल हो गया था।
SNACC पर क्या-क्या बेचती थी Swiggy

SNACC ब्रेकफास्ट आइटम, कॉफी, बेकरी प्रोडक्ट, स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक और भी बहुत कुछ देता था। इसे जनवरी 2025 में पायलट के तौर पर लॉन्च किया गया था, उस समय जब 10-मिनट और 15-मिनट में फूड डिलीवरी पॉपुलर हो रही थी। स्विगी के कॉम्पिटिटर ब्लिंकिट ने भी 15-मिनट में खाना डिलीवर करने के लिए एक अलग ऐप ‘बिस्ट्रो’ लॉन्च किया, जबकि ज़ेप्टो ने ‘Zepto कैफे’ शुरू किया।
स्विगी को हो रहा नुकसान

बढ़ते नुकसान के बीच कंपनी ने SNACC को बंद करने का निर्णय लिया। Q3FY26 में स्विगी का कंसोलिडेटेड नेट लॉस साल-दर-साल 33% बढ़कर ₹1,065 करोड़ हो गया, जबकि ऑपरेटिंग रेवेन्यू 54% बढ़कर ₹6,148 करोड़ हो गया। रेवेन्यू में 76% की बढ़ोतरी के बावजूद इंस्टामार्ट का लॉस 50% बढ़कर ₹791 करोड़ हो गया, जो ₹1,016 करोड़ था।

इसके प्लेटफॉर्म इनोवेशन सेगमेंट, जिसमें स्नैक जैसे वेंचर शामिल थे, का रेवेन्यू साल-दर-साल 59% घटकर ₹9 करोड़ रह गया, जबकि घाटा चार गुना बढ़कर ₹40 करोड़ हो गया था।
10 मिनट की डिलीवरी डेडलाइन हटाने के दिए गए थे निर्देश

कुछ सप्ताह पहले केंद्र ने क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के रिप्रेजेंटेटिव से गिग वर्कर्स की सेफ्टी को लेकर चिंताओं के बीच 10-मिनट की डिलीवरी डेडलाइन हटाने को कहा था।

गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन ने 31 दिसंबर को हड़ताल की, ताकि पूरे भारत में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के अधिकारों, भलाई और सम्मान से जुड़ी मांगों को एक साथ उठाया जा सके।

10-मिनट डिलीवरी मॉडल, हालांकि पॉपुलर है, लेकिन अक्सर डिलीवरी और गिग वर्कर्स को सेफ्टी रिस्क में डालता था।

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