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IIT दिल्ली का कमाल स्टार्टअप, बाढ़-प्राकृतिक खतरे का पहले से लगेगा अंदाजा; AI समिट में दिखाया गया लाइव डेमो

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भारत मंडपम में आयोजित एआइ इंपैक्ट समिट की प्रदर्शनी में आइआइटी दिल्ली द्वारा लगे अर्थसेंस लैब की जानकारी देता विशेषज्ञ। सौजन्य : सुधी पाठक






लोकेश शर्मा, नई दिल्ली। घर, पुल या रेजिडेंशियल कॉलोनी बनाने से पहले, अब भविष्य में किसी दिए गए इलाके में बाढ़, प्रदूषण या दूसरे प्राकृतिक खतरों के संभावित खतरे का अंदाज़ा लगाना मुमकिन होगा। इसी मकसद से, IIT दिल्ली से जुड़े स्टार्टअप अर्थ सेंस लैम्ब्स ने एक डिजिटल ट्विन प्लेटफॉर्म बनाया है जो कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स के संभावित खतरों का साइंटिफिक तरीके से अंदाजा लगाता है।

भारत मंडपम में हुए AI समिट में एक लाइव डेमो में दिखाया गया कि इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किसी भी इलाके की भविष्य की स्थिति का अनुमान लगाने और सुरक्षित और टिकाऊ कंस्ट्रक्शन की योजना बनाने के लिए किया जा सकता है।

IIT दिल्ली में इनक्यूबेट किए गए इस स्टार्टअप को शुरू में इंडिया AI से फंडिंग मिली और बाद में इसने अपनी पूरी डिजिटल ट्विन टेक्नोलॉजी बनाई। कंपनी के CEO और को-फाउंडर, निधिराज कुमार शर्मा, और को-फाउंडर, प्रो. मानवेंद्र सहारिया की लीडरशिप में बनाए गए इस प्लेटफॉर्म को 2025 इनोवेशन अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया।
समिट में लाइव डेमो दिखाने का उदेश्य

समिट में लाइव डेमो के दौरान, विजिटर्स को किसी भी चुने हुए इलाके का 3D डिजिटल मॉडल दिखाया गया। डिजिटल ट्विन टेक्नोलॉजी असली जगह की एकदम वर्चुअल कॉपी बनाती है। लाइट डिटेक्शन और रेंजिंग, सैटेलाइट इमेजरी और जियोस्पेशियल एनालिटिक्स को मिलाकर, यूजर्स अपनी बिल्डिंग, आस-पास के स्ट्रक्चर, रूफटॉप सोलर पोटेंशियल और संभावित प्राकृतिक खतरों का अंदाजा लगा सकते हैं।

इस प्लेटफॉर्म की खास बात यह है कि यह न सिर्फ विज़ुअल मॉडल देता है, बल्कि साइंटिफिक क्लाइमेट सिनेरियो के आधार पर एनालिसिस भी करता है। टेम्परेचर, बारिश के पैटर्न और हवा की दिशा जैसे लॉन्ग-टर्म डेटा को लोकल जियोमॉर्फोलॉजिकल जानकारी के साथ मिलाकर, AI भविष्य में पानी भरने, बाढ़ या लैंडस्लाइड के बढ़ते रिस्क वाले इलाकों का अनुमान लगाता है। इससे इन्वेस्टमेंट या कंस्ट्रक्शन से पहले साइंटिफिक रिस्क का अंदाजा लगाया जा सकता है।

डेवलपर्स के मुताबिक, एक सदी से भी ज्यादा के क्लाइमेट डेटा को इंटीग्रेट किया गया है, और शॉर्ट-टर्म मौसम के अनुमान API के जरिए अपडेट किए जाते हैं। इसका मतलब है कि प्लेटफॉर्म दशकों तक के लॉन्ग-टर्म रिस्क के साथ-साथ आने वाले दिनों के संभावित मौसम के हालात का भी अनुमान लगा सकता है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसी टेक्नोलॉजी अर्बन प्लानिंग के लिए गेम-चेंजर हो सकती है। नगर निकाय ड्रेनेज, हरियाली और कंस्ट्रक्शन प्लानिंग को बेहतर बना पाएंगे, जबकि जनता भविष्य के क्लाइमेट रिस्क को समझकर सोच-समझकर इन्वेस्टमेंट के फैसले ले पाएगी।

आने वाले महीनों में इसे आम यूजर्स के लिए उपलब्ध कराने की तैयारी चल रही है, जिससे यह टेक्नोलॉजी सीधे नागरिकों के हाथों में आ जाएगी और शहरों का विकास ज़्यादा सुरक्षित और सस्टेनेबल हो जाएगा।

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