धूप, दीप और फूल, क्यों इनके बिना अधूरी है आपकी पूजा? हर सामग्री है खास
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/19/article/image/samagri-1771503568457_m.webpपूजा में हर सामग्री का है महत्व (Image Source: AI-Generated)
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जब हम मंदिर में या घर के पूजा घर में बैठते हैं, तो धूप, दीप और फूलों की खुशबू मन को एक अजीब सी शांति देती है। अक्सर हमें लगता है कि यह सिर्फ सदियों से चली आ रही एक परंपरा है, लेकिन असल में पूजा में इस्तेमाल होने वाली हर सामग्री का एक खास महत्व और वैज्ञानिक आधार होता है। आइए समझते हैं कि ये छोटी-छोटी चीजें हमारे जीवन पर कितना बड़ा असर डालती हैं।
1. दीपक
पूजा की शुरुआत हमेशा दीपक जलाकर की जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, दीपक की लौ हमारे भीतर के अज्ञान को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाने का प्रतीक है। घी का दीपक शरीर की नाड़ियों को शुद्ध करता है, जबकि तेल का दीपक नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) को खत्म करने के लिए जलाया जाता है। यह माना जाता है कि दीपक की दिशा भी मायने रखती है। इसे हमेशा देवी-देवता के दाहिनी ओर रखना चाहिए ताकि सकारात्मकता (Positivity) का संचार बना रहे।
2. धूप और अगरबत्ती
धूप या अगरबत्ती का मुख्य उद्देश्य वातावरण को सुगंधित करना है। लेकिन, इसके पीछे का गहरा अर्थ यह है कि जिस तरह अगरबत्ती खुद जलकर दूसरों को सुगंध देती है, उसी तरह मनुष्य को भी अपने अहंकार को त्यागकर दूसरों की सेवा करनी चाहिए।
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माना जाता है कि अगरबत्ती से निकलने वाला धुआं हवा में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करता है और हमारे मस्तिष्क को शांत कर एकाग्रता बढ़ाने में मदद करता है।
3. पुष्प
भगवान को ताजे फूल चढ़ाना हमारी कोमल भावनाओं का प्रतीक है। शास्त्रों के मुताबिक, हर देवता को उनकी पसंद के अनुसार फूल अर्पित करने से मानसिक शांति (Mental Peace) मिलती है।
जैसे मां लक्ष्मी (Maa Laxmi) को कमल और भगवान शिव (Lord Shiva) को बेलपत्र। फूल हमें सिखाते हैं कि जीवन चाहे कितना भी छोटा क्यों न हो, उसे फूलों की तरह खिलकर और महककर जीना चाहिए।
4. नैवेद्य और प्रसाद
पूजा के अंत में भगवान को भोग लगाया जाता है। यह इस बात का प्रतीक है कि हमारे पास जो कुछ भी है, वह ईश्वर का दिया हुआ है। शास्त्रों के अनुसार, जब हम सात्विक भोजन का भोग लगाते हैं और उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं, तो वह केवल भोजन नहीं रह जाता, बल्कि उसमें दिव्य ऊर्जा समाहित हो जाती है जो हमारे अंतर्मन को शुद्ध करती है।
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