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आलस या मानसिक थकान? बर्नआउट के वे संकेत जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं

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बर्नआउट से बचने के लिए क्या करें? (Picture Courtesy: Freepik)



लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर ऐसा होता है कि हम सुबह उठते हैं, लेकिन बिस्तर छोड़ने का मन नहीं करता। काम सामने रखा होता है, पर हम उसे टालते रहते हैं। ऐसे में अक्सर घरवाले या खुद हमारा मन हमें आलसी करार दे देता है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिसे आप आलस समझ रहे हैं, वह असल में बर्नआउट हो सकता है? बर्नआउट एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से पूरी तरह खाली महसूस होने लगता है। आइए समझते हैं कि बर्नआउट के लक्षणों को कैसे पहचानें।
हर समय थकान महसूस करना

आलसी व्यक्ति काम नहीं करना चाहता, लेकिन एक बर्नआउट से जूझ रहा व्यक्ति काम करना चाहता है, पर उसके शरीर में एनर्जी ही नहीं बचती। अगर भरपूर नींद लेने के बाद भी आप सुबह थकान के साथ उठते हैं, तो यह आलस नहीं, बर्नआउट है।
छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन

जब आप बर्नआउट होते हैं, तो आपके सहन करने की क्षमता खत्म हो जाती है। ईमेल का एक नोटिफिकेशन या किसी सहकर्मी का साधारण सा सवाल भी आपको गुस्से से भर सकता है। आलस में इंसान शांत रहता है, लेकिन बर्नआउट में वह मानसिक रूप से बेचैन रहता है।

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(AI Generated Image)
काम से पूरी तरह कटाव

क्या आपको अपने उस काम से नफरत होने लगी है जिसे आप कभी पसंद करते थे? बर्नआउट में इंसान को अपने काम की वैल्यू नजर आना बंद हो जाती है। वह खुद को मशीन की तरह महसूस करने लगता है और सामाजिक मेलजोल से दूरी बना लेता है।
फोकस की कमी और गलतियां करना

अगर आप साधारण से कामों में भी बार-बार गलतियां कर रहे हैं या किसी एक फाइल को पढ़ने में घंटों लगा रहे हैं, तो यह आपके दिमाग का सिग्नल है कि उसे आराम की सख्त जरूरत है।
बर्नआउट को कैसे मैनेज करें?

अगर आपको लगता है कि आप बर्नआउट का शिकार हैं, तो ये कदम आपकी मदद कर सकते हैं-

[*]ना कहना सीखें- अपनी सीमाओं को पहचानें। हर काम की जिम्मेदारी खुद पर न लें। वर्कलोड कम करने के लिए ऑफिस या घर पर बात करें।
[*]डिजिटल डिटॉक्स- ऑफिस के समय के बाद फोन और ईमेल को पूरी तरह बंद कर दें। काम और पर्सनल लाइफ के बीच एक मजबूत दीवार खड़ी करें।
[*]छोटे ब्रेक लें- दिन भर लगातार काम करने के बजाय हर एक घंटे में 5 मिनट का ब्रेक लें। खिड़की से बाहर देखें या थोड़ा टहलें।
[*]नींद और खान-पान- प्रोसेस्ड फूड और कैफीन की ज्यादा मात्रा तनाव बढ़ाती है। बैलेंस्ड डाइट और कम से कम 7-8 घंटे की गहरी नींद जरूर लें।
[*]प्रोफेशनल मदद- अगर स्थिति हाथ से बाहर लगे, तो किसी थेरेपिस्ट या काउंसलर से बात करने में संकोच न करें।

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