कैंची धाम मंदिर करोड़ों के चढ़ावे का घोटाला! नैनीताल हाई कोर्ट सख्त, सरकार और ट्रस्ट से मांगा जवाब
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/19/article/image/kainchi-dham-1771474435312_m.webpहाई कोर्ट ने कैंची धाम मंदिर में अव्यवस्थाओं का लिया स्वत: संज्ञान। फाइल फोटो
जागरण संवाददाता, नैनीताल। उत्तराखंड के प्रसिद्ध बाबा नीब करौरी महाराज स्थापित कैंची धाम में अव्यवस्थाओं का मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान लेती जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के साथ ही डीएम नैनीताल, एसडीएम कैंची धाम, मंदिर ट्रस्ट को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
याचिका में मंदिर ट्रस्ट को जागेश्वर, बद्री-केदारनाथ मंदिर समिति की तर्ज पर सीमित सरकारी नियंत्रण में रखने की मांग उठाई है। पिथौरागढ़ जिले के ग्राम बासीखेत, पोस्ट देवराड़ी पंत ने मुख्य न्यायाधीश को चार पेज का पत्र भेजकर कहा कि 1960 के दशक में स्थापित कैंची धाम बाबा नीब करौरी महाराज के धार्मिक शिक्षाओं, संस्कारों, मान्यताओं और मानवता को समर्पित है। यहां वर्ष भर देश-विदेश के भक्तों और दर्शनार्थियों की भीड़ लगी रहती है।मंदिर को ट्रस्ट संचालित करता है लेकिन ट्रस्ट के बारे में कोई भी जानकारी सार्वजनिक रूप में वेबसाइट, अभिलेख या मौखिक रूप में उपलब्ध नहीं है।
ट्रस्ट के संचालन एवं वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता लगभग शून्य है। आम स्थानीय जनता तो दूर स्थानीय प्रशासन तहसील कैंचीधाम, रजिस्ट्रार कार्यालय नैनीताल एवं जिलाधिकारी कार्यालय नैनीताल को भी यह पता नहीं है कि कैंची धाम मंदिर संचालित करने वाले ट्रस्ट का नाम क्या है?
ट्रस्ट का वित्तीय प्रबंधन पूरी तरह संदेह के घेरे में है। मंदिर की आय एवं व्यय का कोई विवरण सार्वजनिक नहीं किया जाता है। अधिकांश श्रद्धालुओं की ओर से मंदिर में अधिकांश भेंट चढ़ावा नकद में अर्पित किया जाता है। आरोप लगाया कि कैंची धाम मंदिर को ट्रस्टियों ने प्रबंधन एवं वित्तीय अनियमितताओं का केंद्र बना दिया गया है। भेंट चढ़ावा में प्राप्त करोडों-अरबों रुपये चोरी छिपे ढंग से ठिकाने लगाया जा रहा है। ट्रस्ट की ओर से भक्तगणों एवं दर्शनार्थियों के लिए संख्या के अनुसार पीने का पानी और शौचालय की व्यवस्था भी नहीं की जाती है।
राज्य में धार्मिक ट्रस्टों के रजिस्ट्रेशन और संचालन के नियम भारतीय ट्रस्ट अधिनियम-1882 के तहत लागू होते हैं। कैंची धाम को संचालित करने वाले ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन किस रजिस्ट्रार कार्यालय में किया गया था, यह भी सार्वजनिक रूप से विदित नही। नैनीताल रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा अपने कार्यालय में कैंची धाम मंदिर से संबंधित किसी भी ट्रस्ट के रजिस्ट्रेशन होने के संबंध में अनभिज्ञता जाहिर की गयी है।
संदेहास्पद है ट्रस्ट का वित्तीय प्रबंधन
कैंची धाम मंदिर संचालन और संचालकों का वित्तीय प्रबंधन पूर्णतः संदेहास्पद है। नकद में प्राप्त भेंट चढ़ावा का कोई पारदर्शी और विश्वस्त गणक नही रखा गया है। कोई सरकारी नियंत्रण न होने से धर्म और आस्था के नाम पर वित्तीय प्रबंधन लुका छिपी का खेल बना हुआ है, आरोप यह भी लगाया है कि कैंची धाम मंदिर को कुछ लोगों द्वारा अघोषित लूट का केंद्र बनाया हुआ है। कुछ माह पूर्व ट्रस्ट की ओरसे 2.5 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष में दिया गया था। मंदिर संचालकों का अता पता डीएम-एसडीएम व तहसीलदार कार्यालयों में उपलब्ध नही है। यह धर्म आस्था के नाम पर साजिश एवं गिरोहबंदी है।
उन्होंने ट्रस्ट की ऑडिट रिपोर्ट और ट्रस्ट के नाम दर्ज अचल संपत्ति, स्थानीय ग्रामवासियों की ओर से ट्रस्ट को दान की गई भूमि का पूरा विवरण सार्वजनिक करने, ट्रस्ट में मंदिर के लिए भूमि दान में देने वाले स्थानीय लोगों को ट्रस्टी बनाने की मांग की है।
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