अजब हाल है: पाइप फटने के डर से प्रधान ने बंद कराई टंकी, कागजों में 600 घरों तक पहुँच गया पानी!
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/18/article/image/73125338-1771437589354_m.webpग्राम पंचायत वीरपुर थान में बना पेयजल टैंक। जागरण
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। प्रधानमंत्री जन कल्याण कार्यक्रम और बाद में जल जीवन मिशन के तहत गांव-गांव तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का सपना दिखाया गया था, लेकिन हकीकत में यह सपना आज भी अधूरा है। जिले के मूंढापांडे विकास खंड की ग्राम पंचायत वीरपुर थान में करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद लोगों को आज तक घरों में पानी नहीं मिल सका है। पाइप लाइन फटने के डर से प्रधान ने टंकी को बंद करा दिया।
गांव की आबादी करीब पांच हजार है। यहां वर्ष 2012-13 में 500 किलोलीटर क्षमता की पानी की टंकी स्वीकृत हुई थी। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि जल्द ही हर घर में नल से पानी पहुंचेगा। बिजली कनेक्शन कराया गया और वर्ष 2015 में पाइपलाइन बिछाई गई, लेकिन धनराशि न मिलने के कारण काम अधूरा रह गया। ठेकेदार बीच में ही काम छोड़कर चला गया और योजना वर्षों तक ठप पड़ी रही।
वर्ष 2022 में शामिल की गई थी अधूरी परियोजना
वर्ष 2022 में इस अधूरी योजना को जल जीवन मिशन में शामिल किया गया। केंद्र सरकार से धन मिलने के बाद फिर से काम शुरू हुआ। नया ठेकेदार लगाया गया और कुछ हिस्सों में दोबारा पाइप लाइन डाली गई। लागत भी बढ़कर दो करोड़ रुपये से अधिक हो गई। ग्रामीणों को लगा कि अब उनका इंतजार खत्म होगा, लेकिन यह उम्मीद भी जल्द ही टूट गई।
जब पानी की सप्लाई शुरू की गई तो कमजोर पाइप और घटिया जोड़ सामने आ गए। पानी का दबाव सहन न कर पाने के कारण कई जगह पाइप फट गए। जगह-जगह लीकेज होने लगा। पानी घरों तक पहुंचने के बजाए सड़कों पर बहने लगा, जिससे रास्ते खराब होने लगे। हालत यह हो गई कि एक घंटे भी पानी चलाने पर गांव में कई स्थानों पर जलभराव हो जाता है।
2023 में बनकर तैयार हुई थी टंकी
स्थिति बिगड़ते देख गांव के प्रधान मोहम्मद अकरम ने सप्लाई बंद करा दी। उनका कहना है कि लगातार लीकेज से सड़कें टूटने लगी थीं। मजबूरी में आपरेटर को पानी न चलाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कई बार अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
आपरेटर शादाब ने बताया कि वर्ष 2023 में टंकी पूरी तरह बनकर तैयार हुई थी। जब पहली बार पानी चलाया गया, तभी 15 से अधिक स्थानों पर पाइप लाइन फट गई। दबाव झेलने की क्षमता न होने के कारण रोज मरम्मत कराना संभव नहीं है। कागजों में गांव में करीब 600 कनेक्शन दिखाए गए हैं, लेकिन आज तक किसी भी घर में नियमित पानी नहीं पहुंचा।
हैंडपंप और टैंकर पर निर्भर
मुस्ताक अली का कहना है कि नल और कनेक्शन होने के बावजूद उन्हें हैंडपंप और टैंकर पर निर्भर रहना पड़ता है। शमीम बानो बताती हैं कि रोज सुबह पानी भरने के लिए दूर जाना पड़ता है। रफीक अहमद का आरोप है कि ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत से घटिया काम कराया गया। शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं होती।
मुरादाबाद–ठाकुरद्वारा मार्ग के पास बसे इस गांव में सड़क और बिजली की सुविधा होने के बावजूद पेयजल जैसी बुनियादी जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जब शहरों में नियमित पानी मिल सकता है, तो गांवों को इससे क्यों वंचित रखा जा रहा है। पूरे मामले में विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
आरोप- कागजों में दिखाया पूरा काम
कमजोर पाइप कैसे लगाए गए, गुणवत्ता की जांच क्यों नहीं हुई और भुगतान कैसे कर दिया गया, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना मौके पर जांच किए ही कागजों में काम पूरा दिखा दिया गया। ग्रामीणों ने जल निगम, ब्लाक कार्यालय और जिला प्रशासन से कई बार शिकायत की, लेकिन न तो जांच हुई और न ही जिम्मेदारों पर कार्रवाई।
नतीजा यह है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी योजना शोपीस बनकर रह गई है। ग्रामीणों की मांग है कि पूरी पाइप लाइन की तकनीकी जांच कराई जाए, घटिया सामग्री को बदला जाए और दोषी ठेकेदार व अधिकारियों पर कार्रवाई हो। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो फिर से शिकायत करूंगा। आज हालात यह हैं कि वीरपुर थान के लोग नल खोलते हैं, लेकिन पानी की जगह सिर्फ हवा निकलती है। करोड़ों की योजना के बावजूद गांव आज भी प्यासा है और हर घर जल का सपना अधूरा पड़ा है।
जल जीवन मिशन के तहत जिले में दो कंपनियां काम कर रही हैं। दोनों कंपनियों के अधिकारियों को बुलाकर कई बार काम पूरा कराने के लिए कहा गया है। धनराशि नहीं मिलने के कारण भी कुछ स्थानों पर काम बंद है। धनराशि मिलने के बाद जल्द ही काम शुरू कराने का प्रयास करेंगे।
- मृणाली अविनाश जोशी, मुख्य विकास अधिकारी, मुरादाबाद
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