कैबिनेट के संकल्प से खुलेगी बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने की राह, केंद्र व सुप्रीम कोर्ट की एम्पावर्ड कमेटी देगी हरी झंडी
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/19/article/image/Untitled-3-copy-1771473650576_m.webpवन विभाग को खत्तों से संबंधित एकल प्रस्ताव भेजना होगा। जागरण
किशोर जोशी, नैनीताल। जिले के बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने की प्रक्रिया मुश्किल नहीं तो आसान भी नहीं है। जानकारों के अनुसार वन विभाग की ओर से बिंदुखत्ता के डिफारेस्टशन से संबंधित एकल प्रस्ताव भेजा जाएगा गा और फिर राज्य कैबिनेट इस मामले में संकल्प पारित करेगी तो राजस्व गांव बनाने की बाधा दूर हो जाएगी। इसके बाद केंद्र सरकार व सुप्रीम कोर्ट की एंम्पावर कमेटी की मुहर लगने के बाद ही बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने की मांग पूरी होगी। सूत्रों के अनुसार प्रमुख सचिव वन इस पूरे मामले को गंभीरता से देख रहे हैं।
दरअसल आजादी के बाद वनों का प्रबंधन पूरी तरह राज्यों के अधीन था तो 1975 तक देश में चार लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल से वनों का सफाया हो गया। इसके बाद 1980 में वन अधिनियम अस्तित्व में आया।
पूर्व अपर प्रमुख वन संरक्षक डा. कपिल जोशी बताते हैं कि 1966 में तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से बिंदुखत्ता को डिफोरेस्टेशन करने से संबंधित पत्र आया था लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। जोशी के अनुसार बिंदुखत्ता में पेड़ों के अवैध कटान से संबंधित चार हजार से अधिक मामलों में वन विभाग की ओर से जुर्म काटे गए हैं, इसमें अभी भी ऐसे केस हैं, जो पूरी तरह निस्तारित नहीं हुए हैं। राज्य सरकार को पांच हेक्टेयर तक के वन भूमि हस्तांतरण का अधिकार है, लेकिन बिंदुखत्ता में 3400 हेक्टेयर वन भूमि है।
2007-08 में भेजा गया था प्रस्ताव
नैनीताल: पूर्व अपर पीसीसीएफ डा. जोशी के अनुसार वन विभाग की ओर से 2007-08 में तराई पूर्वी वन प्रभाग के माध्यम से बिंदुखत्ता सहित अन्य खत्तों में कब्जे नियमित करने व इसमें प्रभावितों से नियमानुसार जुर्माना काटने का प्रविधान किया गया था लेकिन इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने 2014 में खारिज कर दिया था। डा. जोशी के अनुसार अब नए सिरे से केवल बिंदुखत्ता का एकल प्रस्ताव बनाकर भेजा जाए।
यहां उल्लेखनीय है कि रामनगर के लेटी व बूंगा तथा चोपड़ा गांव में वन क्षेत्रफल पांच हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल होने की वजह से राजस्व गांव बन गए। टिहरी विस्थापितोंं के बसाए पशुलोक ऋषिकेश भी इसी आधार पर राजस्व गांव बन गया। 2009 में तत्कालीन सीएम बीसी खंडूड़ी, 2015 में तत्कालीन सीएम हरीश रावत व 2024 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने की घोषणा कर चुके हैं।
1984 में हुए थे अवैध निर्माण ध्वस्त
नैनीताल: बिंदुखत्ता में 1984 में वन भूमि पर अवैध निर्माणों को पूरी तरह ध्वस्त कर खाली किया गया था। इसके बाद फिर से धीरे-धीरे वहां बसासत होती रही और गढ़वाल-कुमाऊं के विभिन्न क्षेत्रों के पूर्व सैनिकों सहित अन्य ने जमा पूंजी खर्च कर आशियाने बनाए और भूमि को खेती योग्य बनाया। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि दमुवाढूंगा को राजस्व गांव बनाने का मार्ग तब प्रशस्त हुआ था जब वन अधिनियम की धारा-25 की अधिसूचना प्रस्ताव में छूट गई थी।
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