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जन्म से नहीं हैं हाथ, पैरों से मैट्रिक की परीक्षा लिख रही है ओडिशा की लक्ष्मी; टीचर बनने का है सपना

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पैरों से मैट्रिक की परीक्षा लिख रही है ओडिशा की लक्ष्मी



जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। मलकानगिरी जिला की दिव्यांग छात्रा लक्ष्मी खेमुडु अदम्य साहस और आत्मविश्वास की मिसाल बनकर उभरी हैं। वह आज से शुरू हुई मैट्रिक परीक्षा हाथों से नहीं, बल्कि पैरों से लिखकर परीक्षा देने केंद्र पहुंची। जन्म से दिव्यांग लक्ष्मी का सपना शिक्षित होकर शिक्षिका बनना और आसपास के बच्चों को पढ़ाना है।

लक्ष्मी मलकानगिरी जिले के सिंद्रिमाल पंचायत अंतर्गत बंधगुड़ा गांव निवासी नारायण खेमुडु की पुत्री है। वह पीएमश्री सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय, सिंदिमाल में कक्षा दसवीं की छात्रा हैं। जन्म से ही उनके दोनों हाथ निष्क्रिय हैं, वहीं पैर भी पूरी तरह सामान्य नहीं हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
अन्य छात्रों की तुलना में काफी आगे

व्हीलचेयर की मदद से लक्ष्मी प्रतिदिन स्कूल जाती हैं और नियमित रूप से पढ़ाई करती है। पढ़ाई में वह अन्य छात्रों की तुलना में काफी आगे है। विद्यालय की शिक्षिकाओं का कहना है कि लक्ष्मी कभी खुद को दिव्यांग नहीं मानता और न ही दूसरों को ऐसा महसूस करने देती है।

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लक्ष्मी का परीक्षा केंद्र घर से लगभग पांच किलोमीटर दूर सतीगुड़ा हाई स्कूल में निर्धारित किया गया है। दिव्यांग होने के कारण वह चाहती तो घर से परीक्षा दे सकती थी या स्क्राइब की सुविधा ले सकती थी, लेकिन उसने इन दोनों विकल्पों को ठुकरा दिया। उसका कहना है कि वह अन्य विद्यार्थियों के साथ बैठकर, अपनी मेहनत और क्षमता के बल पर परीक्षा देना चाहती हैं।
बैठकर परीक्षा देने की विशेष व्यवस्था

प्रशासन द्वारा लक्ष्मी के लिए नीचे बैठकर परीक्षा देने की विशेष व्यवस्था की गई है। एडमिट कार्ड हाथ में लेकर लक्ष्मी अपने सपनों को साकार करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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विद्यालय परिवार और गांववासी लक्ष्मी पर गर्व महसूस कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि लक्ष्मी जैसी छात्रा समाज के लिए प्रेरणा हैं। पूरा गांव उनकी सफलता और उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहा है।
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