नोएडा में यातायात सुधार: एनकैप फंड से बनेंगी चार अत्याधुनिक पजल पार्किंग; स्थानों का हुआ चयन
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/18/article/image/Encape-1771436954632_m.webpपजल पार्किंग का निर्माण एनकैप फंड से कराया जाएगा।
कुंदन तिवारी, नोएडा। नोएडा ट्रैफिक सेल (एनटीसी) भंग करने के बाद अब वर्क सर्किल एरिया में इसका मर्जर कर दिया गया है। यानी अब वाहन पार्किंग, सड़क सुरक्षा से संबंधित सभी कार्य वर्क सर्किल अधिकारी की निगरानी में होंगे। इस नई व्यवस्था के बाद अब नए सिरे से शहर को यातायात जाम मुक्त बनाने, सड़क से सरफेस पार्किंग को पूरी तरह से खत्म करने, व्यवस्थित ढंग से पार्किंग का संचालन कराने की दिशा पर काम शुरू कर दिया गया है।
चार पजल पार्किंग बनाने का फैसला हुआ है। इसके लिए चार स्थानों का चयन कर कार्ययोजना तैयार करने काम शुरू हो गया है, जिससे जल्द से जल्द इस परियोजना को धरातल पर उतारा जा सके। बताया जा रहा है कि अक्टूबर तक इस परियाेजना पर काम शुरू कराकर प्राधिकरण को रिपोर्ट वायु गुणवत्ता आयोग के पास जमा करानी है, क्योंकि इस परियोजना पर आने वाला करीब 60 करोड़ रुपये का खर्च एनकैप फंड के जरिये खर्च होगा।
बता दें कि कार्ययोजना में एस्टीमेट बनाने वाली कंपनी, लोकेशन और पार्किंग क्षमता की पूरी जानकारी अक्टूबर तक केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। इन पार्किंग का निर्माण एनकैप फंड से कराया जाएगा। इसलिए पूरी जानकारी प्राधिकरण भेजेगा। पहली पजल पार्किंग सेक्टर-63, दूसरी सेक्टर-62, तीसरी सेक्टर-124, चौथी सेक्टर-15 पर बनाई जाएगी।
तीन से छह मिनट में होगी पार्क
यह पार्किंग हाइड्रोलिक पार्किंग से अलग होती है। आटोमैटिड पजल पार्किंग एक पजल गेम की तरह है। इसमें जितने पार्किंग स्लाट होते है उतने ही स्टैंड होते है। जो ऊपर, नीचे, दायीं, बायीं ओर मूवबेल होते है। एक कार को पार्क करने में तीन से छह मिनट का समय लगता है। यानी मल्टीलेवल और हाइड्रोलिक या अन्य स्थानों पर पार्किंग करने पर गाड़ी निकालने और पार्क करने में आपको 15 से 20 मिनट का समय लगता है। नोएडा में चार से छह फ्लोर तक की आटोमैटिड पजल पार्किंग बनाएंगे। इसके प्रत्येक फ्लोर पर 25 कार आसानी से पार्क हो सकेंगे।
पार्किंग निर्माण में नहीं लेता स्पेस
इस तरह की पार्किंग के निर्माण में ज्यादा स्पेस की जरूरत नहीं होती। बहुत कम स्पेस में पांच से छह फ्लोर तक की वाहन पार्किंग को तैयार किया जा सकता है। यह पूरी पार्किंग सेंसर बेस्ड होती है। इसलिए चोरी से लेकर टूट फूट का खतरा नहीं होता। आपरेशन के लिए ज्यादा मैन पावर की आवश्यकता नहीं है। हालांकि संचालन के लिए उसी कंपनी को वरियता दी जाएगी, जो पहले इसका संचालन कर चुकी है।
पीली लाइन पार करते ही रुक जाएगा सिस्टम
यह पार्किंग आटोमैटिड है। इसमें गाड़िया ग्राउंड से एक फ्लोर से दूसरे फ्लोर में शिफ्ट होती है। उसी तरह नीचे आती है। ये पूरा काम मशीनों के जरिये होता है। यह पूरी तरह से सेंसर युक्त होगा। यदि कोई बच्चा या जानवर गलती से पार्किंग के अंदर आ जाए तो आटोमैटिक सिस्टम उसी जगह पर कार को रोक देगा, जहां तक वह पहुंची है। इससे कार नीचे नहीं आएगी, ताकि कोई दब न जाए। इसकी रेंज तय की जा सकेगी, पीली लाइन से इंडीकेट किया जाएगा।
वाहनों की पार्किंग बहुत ही कम दर पर कराई जाएगी, संचालन व विज्ञापन के जरिये इस पर आने वाले खर्च को निकाला जाएगा, जिससे अधिक से अधिक लोग अपने वाहनों को पजल पार्किंग में खड़ा कर सके। कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया गया है। - कृष्णा करुणेश, सीईओ, नोएडा प्राधिकरण
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