यूपी में विधायकों का फोन रिसीव नहींं करने वाले अधिकारियों पर होगी कड़ी कार्रवाई, विधान सभा अध्यक्ष ने सुनाया फैसला
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/18/article/image/satish-mahana--1771422053782_m.webpराज्य ब्यूरो, लखनऊ। विधायकों के फोन कॉल रिसीव नहीं करने वाले अधिकारियों के मसले पर विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना ने बुधवार को अपना फैसला सुनाया। जिसमें अधिकारियों के लिए निर्देश है कि वे जनप्रतिनिधियों का सम्मान करते हुए उनके फोन रिसीव करें। आदेशों का पालन नहीं होने पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
अध्यक्ष महाना ने नियम 300 के तहत दिए गए अपने फैसले में संसदीय कार्यमंत्री से कहा कि वह निर्देश जारी कर स्पष्ट करें के शासन द्वारा पूर्व में जारी किए गए आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। अनुपालन नहीं किए जाने पर कड़ी अनुशासनिक कार्यवाही होगी। निर्देशों का अनुपालन अधिकारियों द्वारा नहीं किया जाना उसकी सेवा नियमावली का उल्लंघन है।
मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने विधान सभा में कहा था कि कार्यपालिका द्वारा विधायिका और न्यायपालिका के क्षेत्राधिकार में हस्तक्षेप किया जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा था कि न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका तीनों का अपना अधिकार क्षेत्र है। तीनों को एक दूसरे के कामों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। वर्तमान में कार्यपालिका विधायिका पर हावी होती जा रही है। कहीं कहीं न्यायपालिका को प्रभावित किया जा रहा है।
विधायिका की पीठ से भी जो निर्देश दिए जाते हैं, कार्यपालिका द्वारा उसका अनुपालन भी सुनिश्चित नहीं किया जाता है। यह आपत्तिजनक है। उन्होंने कहा था कि अधिकारियों द्वारा विधायकों को समुचित सम्मान नहीं दिया जाता, उनकी सुनवाई भी नहीं की जाती है। इसके साथ ही विधायकों के फोन काल भी रिसीव नहीं करते हैं।
सपा के मुख्य सचेतक कमाल अख्तर तथा डॉ. संग्राम यादव तथा सपा सदस्य डा. रागिनी सोनकर ने भी इस मुद्दे को उठाया। सपा द्वारा उठाए गए इस मुद्दे पर संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा था कि पूर्व में इसी सदन में अधिकारियों को सजा दी गई थी।
सरकार के वर्तमान कार्यकाल में वर्षों से लंबित प्रकरणों को निस्तारित करते हुए कई अधिकारियों को दंडित किया गया है। कहा था कि इस संबंध में कई शासनादेश जारी किए गए हैं, शासन की तरफ से भी अधिकारियों को यह निर्देश दिए गए हैं कि टेलीफोन काल का जवाब दें। अधिकारियों की तरफ से यदि विधायकों की बात को नहीं सुना जाता है तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह भी पढ़ें- बिजली के मुद्दे पर मंत्री एके शर्मा और शिवपाल यादव में नोकझोंक, विधान सभा अध्यक्ष ने दोनों नेताओं को कराया शांत
Pages:
[1]