Robodog: मेटल का कुत्ता, जो न भौंकता न काटता, लेकिन बड़े काम का, क्या है ये बला? जिसने बढ़ा दी Galgotias यूनिवर्सिटी की मुश्किलें
कल्पना कीजिए कि आपके पास एक ऐसा पालतू कुत्ता है, जो न भौंके न काटे, जिसके न ही पूंछ हो और खतरनाक से खतरनाक जगहों पर जाकर ये आपकी मदद भी करता हो। बस फर्क इतना होगा कि ये कुत्ता मांस और हड्डी से नहीं बल्कि मेटल से बना होगा और इसके पास दिमाग नहीं बल्कि एडवांस टेक्नोलॉजी होगी। इन्हें ही कहा जाता है Robodog या Robotic Dog। चलिए आज हम Robodog के बारे में बात करेंगे, खासकर वो विवाद जो हाल ही में India AI Impact Summit 2026 में Galgotias University के साथ हुआ। हम जानेंगे कि Robodog क्या है, इसका कॉन्सेप्ट सबसे पहले कब और कैसे आया, अब ये कहां इस्तेमाल हो रहा है?AI Summit 2026 में क्या हुआ?
ये समिट दिल्ली के भारत मंडपम में 16 फरवरी 2026 से शुरू हुआ, जहां PM मोदी ने उद्घाटन किया। ये भारत की AI तकनीक को दुनिया के सामने दिखाने का एक बड़ा इवेंट है। इसमें Galgotias University ने भी अपना स्टॉल लगाया और वहां एक Robodog दिखाया, जिसका नाम रखा \“Orion\“।
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यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह ने वीडियो में कहा कि ये उनके सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में बनाया गया है। लेकिन सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ और लोगों ने पहचान लिया कि ये चाइनीज कंपनी Unitree का Go2 मॉडल है, जो इंडिया में 2-3 लाख रुपए में ऑनलाइन मिलता है! ये कोई इन-हाउस इनोवेशन नहीं था, बल्कि इम्पोर्टेड प्रोडक्ट था। लोगों ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी ने इसे अपना बताकर धोखा दिया।
विवाद तब और बढ़ गया, जब चाइनीज मीडिया ने भारत का मजाक उड़ाया, ये कहते हुए कि भारत की AI समिट में चाइनीज रोबोट्स को अपना बताया जा रहा है। राहुल गांधी ने भी ट्वीट किया कि मोदी सरकार AI को मजाक बना रही है।
उन्होंने लिखा, “भारत की प्रतिभा और डेटा का लाभ उठाने के बजाय, AI समिट एक अव्यवस्थित PR तमाशा बन गया है - भारतीय डेटा बिक्री के लिए पेश किया जा रहा है, चीइनीज प्रोडक्ट का प्रदर्शन किया जा रहा है।“
इतनी नहीं एक वीडियो में केंद्रीय IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी उस रोबोट का प्रमोशन किया। हालांकि, उन्होंने बाद में वो वीडियो भी डिलीट कर दिया, लेकिन उन्होंने कहीं भी ये दावा नहीं किया था कि ये रोबोट भारत में बना है।
इस बवाल के बाद सरकार ने Galgotias यूनिवर्सिटी को स्टॉल खाली करने को कहा, और यूनिवर्सिटी ने सफाई दी कि उन्होंने कभी दावा नहीं किया कि ये उन्होंने बनाया है। यूनिवर्सिटी ने कहा- ये सिर्फ स्टूडेंट्स की रिसर्च के लिए इस्तेमाल हो रहा था। लेकिन सोशल मीडिया पर मीम्स बने, और ये भारत की इनोवेशन इमेज पर सवाल उठाता है।
Robodog क्या है?
सरल शब्दों में, Robodog एक रोबोट है, जो कुत्ते की तरह दिखता और चलता है। ये चार पैरों वाला रोबोट होता है, जिसे \“क्वाड्रुपेड रोबोट\“ कहते हैं। ये असली कुत्ते की तरह दौड़ सकता है, कूद सकता है, यहां तक कि सीढ़ियां चढ़ सकता है। लेकिन ये AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से चलता है, मतलब ये खुद सोच-समझ सकता है।
Robodog का कॉन्सेप्ट सबसे पहले कब, कहां और कैसे आया?
Robodog की जड़ें पुरानी हैं। सबसे पहला Robodog साल 1940 में अमेरिका में बना, नाम था Sparko। ये Westinghouse कंपनी ने बनाया, जो एक रोबोट डॉग था, जो भौंक भी सकता था, पूंछ हिला सकता था और बैठ सकता था।
ये Elektro नाम के रोबोट का साथी था, जो 1939 के New York World Fair में दिखाया गया। लेकिन ये बिका नहीं, क्योंकि लोगों ने इसमें कुछ खास इंटरेस्ट नहीं दिखाया।
फिर 1990 के दशक में जापान की Sony ने AIBO बनाया। 1998 में इसका प्रोटोटाइप आया, और 1999 में पहला मॉडल लॉन्च हुआ। AIBO AI से चलता था, पर्सनैलिटी डेवलप करता था, और पेट के रूप में इस्तेमाल होता था।
डॉ. तोशितादा दोई और मसाहिरो फुजिता ने इसे बनाया था, क्योंकि वे मानते थे कि 2010 तक रोबोट्स घरों में आम होंगे। लेकिन ये एंटरटेनमेंट के लिए था, न कि उपयोगी कामों के लिए। 2006 तक इसके नए मॉडल आए, लेकिन फिर बंद हो गए। 2018 में Sony ने नया AIBO लॉन्च किया, जो ज्यादा एडवांस था।
फिर इस मैदान में Boston Dynamics भी उतरी। 2005 में उन्होंने BigDog बनाया, जो 240 पाउंड का भारी रोबोट था, वो भी सिर्फ मिलिट्री के लिए। ये असली कुत्ते की तरह बैलेंस रखता था और सामान ढो सकता था।
बाद में आया Spot, जो आज का मॉडर्न Robodog है। Unitree जैसी Chinese कंपनियां भी अब सस्ते मॉडल बना रही हैं। कुल मिलाकर, Robodog का कॉन्सेप्ट एंटरटेनमेंट से शुरू होकर मिलिट्री यूज और दूसरे कामों तक पहुंचा।
अब Robodog कहां इस्तेमाल हो रहा है?
आज Robodog कई क्षेत्रों में काम कर रहा है। अब ज्यादातर रोबोडॉग किसी आपदा में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने में भी इस्तेमाल किए जाते है।
[*]सर्च एंड रेस्क्यू में: जैसे Arizona State University का Unitree Go2, जो आपदाओं में लोगों को ढूंढता है।
[*]इंडस्ट्री में: Siemens और Boston Dynamics का Spot प्लांट इंस्पेक्शन करता है – खतरनाक जगहों पर डेटा कलेक्ट करता है, वर्कर्स को सुरक्षित रखता है।
[*]मिलिट्री और सिक्योरिटी में: SWAT टीम्स इस्तेमाल करती हैं, थर्मल इमेजिंग से दुश्मन ढूंढने के लिए।
[*]खेतीबाड़ी में: James Hutton Institute में Spot फसल ट्रायल्स की मॉनिटरिंग करता है।
[*]कंपैनियनशिप में: बुजुर्गों या विकलांगों के लिए गाइड डॉग की तरह, जैसे ASU का रोबोट ब्लाइंड लोगों की मदद करता है।
इसके अलावा फ्लोरिडा में इनवेसिव स्नेक कैच करने के लिए, या स्पेस रिसर्च में। Boston Dynamics का Spot 360° विजन से काम करता है, और Unitree Go2 AI फॉलो मोड से चलता है।
AI समिट में दिखाए गए रोबोटिक डॉग पर विवाद: Galgotias University ने कहा– “गलतफहमी की वजह से मामला बढ़ा”
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