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अशोक चौधरी डिग्री विवाद: Ph.D से असिस्‍टेंट प्रोफेसर तक, बिहार में छिड़े सियासी संग्राम का A To Z

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मंत्री अशोक चौधरी की डिग्री पर घमासान।



ड‍िजि‍टल डेस्‍क, पटना। Ashok Chaudhary Degree: बिहार सरकार के मंत्री डॉ. अशोक चौधरी का डिग्री विवाद एक बार फिर चर्चा में है। असिस्‍टेंट प्रोफेसर के रूप में चयन के बाद उनकी शैक्षणिक योग्यता पर नए सिरे से सवाल खड़े किए गए हैं।

एएन कॉलेज में नियुक्‍त‍ि के बाद राजद ने उनकी डिग्री को फर्जी बताते हुए हमला बोला है, जबकि इससे पहले कांग्रेस उनकी पीएचडी डिग्री को संदिग्ध बता चुकी है। हालांक‍ि राजद विधान पार्षद डॉ. सुनील कुमार सिंह के आक्षेप पर मंत्री ने करारा पलटवार किया है।   

गौरतलब है कि बिहार के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया करीब पांच साल पहले शुरू हुई थी। आयोग ने 280 पदों के लिए विज्ञापन निकाला था, जिसका परिणाम 4 जुलाई 2025 को घोषित हुआ।

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(विधान परिषद में मंत्री अशोक चौधरी और विधान पार्षद डॉ. सुनील सिंह।)
श‍िक्षा विभाग ने रोकी थी नियुक्‍त‍ि

इसके बाद 1 अगस्त को आयोग ने 274 सफल अभ्यर्थियों की सूची शिक्षा विभाग को भेजी। सूची की जांच के दौरान शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने राजनीति विज्ञान विषय से संबंधित नियुक्तियों में कुछ विसंगतियां पाईं।

उसके बाद इस विषय की नियुक्ति प्रक्रिया रोक दी गई। मामला धीरे-धीरे विपक्ष के पास पहुंच गया और राजनीतिक रंग लेने लगा।
दो नाम की वजह से शुरू हुआ विवाद

शिक्षा विभाग का कहना था कि डॉ. चौधरी के प्रमाणपत्रों में कहीं नाम अशोक कुमार तो कहीं अशोक चौधरी दर्ज है। इसी संदर्भ में 1 जनवरी 2026 को उच्च शिक्षा निदेशक ने बिहार विश्‍वविद्यालय सेवा आयोग को पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांगा।

आयोग ने अपने बिंदुवार जवाब में स्पष्ट किया कि मैट्रिक से लेकर पीएचडी तक सभी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों में नाम अशोक कुमार दर्ज है।

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(बिहार सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग के मंत्री डॉ. अशोक चौधरी। फाइल)
प्रमाणपत्रों में कोई विसंगत‍ि नहीं

वहीं मगध विश्वविद्यालय के अनुग्रह अवार्ड में नाम अशोक कुमार उर्फ अशोक चौधरी अंकित है। उनके शोध आलेख Political Awakening of Dalits in Indian Political System (Wisdom Herald) में भी यही नाम दर्ज है।

जाति प्रमाणपत्र में उन्होंने अपना नाम अशोक चौधरी उर्फ अशोक कुमार और पिता का नाम महावीर चौधरी बताया है।आयोग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अशोक कुमार और अशोक चौधरी दोनों नाम एक ही व्यक्ति के हैं, और इसमें किसी प्रकार की फर्जीवाड़े की पुष्टि नहीं होती।

दरअसल, अंतिम रूप से चयनित 274 अभ्यर्थियों की सूची जारी की गई। इसी सूची में राजनीति विज्ञान विषय के तहत अनुसूचित जाति कोटे से 10वें स्थान पर डॉ. अशोक चौधरी का नाम आने के बाद विवाद शुरू हुआ।
शिक्षा मंत्री ने सदन में दिया था जवाब

कांग्रेस का आरोप है कि राजनीति विज्ञान में नियुक्ति पत्र पाने वाले 18 अभ्यर्थियों में डॉ. अशोक चौधरी का नाम शामिल नहीं है।

कांग्रेस प्रवक्ता असितनाथ तिवारी ने दावा किया कि मंत्री की डॉक्टरेट डिग्री संदिग्ध है और यह बिहार के बेरोजगार युवाओं के साथ अन्याय है।

विवाद बढ़ने पर शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था कि डॉ. चौधरी का मामला आयोग के पास मंतव्य के लिए भेजा गया है। उनके प्रमाणपत्रों में कुछ खामियां पाई गई थीं, इसलिए नियुक्ति फिलहाल रोकी गई।

फिलहाल, आयोग की सफाई के बावजूद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं और डॉ. अशोक चौधरी का डिग्री विवाद एक बार फिर बिहार की सियासत के केंद्र में आ गया है।

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