डिफेसमेंट केस में अरविंद केजरीवाल को राहत, दिल्ली कोर्ट ने खारिज की विरोध याचिका
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/18/article/image/arvind-kejriwal-(3)-1771414779105_m.webpदिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल। (फाइल फोटो)
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ दर्ज सार्वजनिक संपत्ति डिफेसमेंट मामले में दिल्ली पुलिस की अज्ञात रिपोर्ट के खिलाफ दायर विरोध याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि पुलिस की जांच संतोषजनक है और आगे जांच के लिए कोई ठोस आधार नहीं बनता।
यह विरोध याचिका शिकायतकर्ता शिव कुमार सक्सेना ने दायर की थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि द्वारका इलाके में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया और इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दिल्ली पुलिस ने संपत्ति विरूपण के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों का पता लगाने के पर्याप्त प्रयास किए, लेकिन मुख्य आरोपित की पहचान नहीं हो सकी।
पुलिस की जांच संतोषजनक, आगे जांच के लिए ठोस आधार नहीं- कोर्ट
अदालत ने स्पष्ट किया कि दिल्ली प्रिवेंशन ऑफ डिफेसमेंट आफ प्रॉपर्टी एक्ट के तहत जिम्मेदारी द्वितीयक प्रकृति की होती है और जब तक मुख्य आरोपित का पता न चले, तब तक अन्य पर देयता नहीं डाली जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि यदि इसके विपरीत व्याख्या की जाए तो आरोपित व्यक्तियों के लिए यह साबित करना असंभव हो जाएगा कि कृत्य उनकी जानकारी या सहमति के बिना हुआ।
इससे पहले, सात जनवरी 2026 को अदालत ने शिकायत का निस्तारण करते हुए कहा था कि द्वारका साउथ थाने में प्राथमिकी पहले ही दर्ज हो चुकी है और चार दिसंबर 2025 को पुलिस ने अज्ञात रिपोर्ट दाखिल की थी, जो विचाराधीन है।
जांच के दौरान पूर्व विधायक गुलाब सिंह और निगम पार्षद नितिका शर्मा से पूछताछ की गई थी। पुलिस ने अदालत को बताया था कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली में मौजूद नहीं होने के कारण उनसे पूछताछ नहीं हो सकी और जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है।
मामले में 11 अगस्त को एफएसएल ने एक सीडी की जांच रिपोर्ट भी अदालत में दाखिल की थी। 28 मार्च 2025 को पुलिस ने अदालत को सूचित किया था कि शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। शिकायत में वर्ष 2019 में द्वारका क्षेत्र में सार्वजनिक संपत्ति के विरूपण का आरोप लगाया गया था।
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