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मई तक पूरा होगा इंडो-नेपाल बॉर्डर सड़क परियोजना, सीमावर्ती जिलों को मिलेगी नई रफ्तार

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554 किलोमीटर लंबी इस सड़क का 95% से अधिक कार्य पूरा



डिजिटल डेस्क, पटना। Bihar\“s Indo-Nepal Border Road Project बिहार में भारत-नेपाल सीमा से सटे जिलों को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित इंडो-नेपाल बॉर्डर सड़क परियोजना अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। राज्य सरकार ने इसे मई तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। इस परियोजना से पूर्वी और पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज जैसे सीमावर्ती जिलों को सीधा लाभ मिलेगा।
95 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा

पथ निर्माण विभाग के अनुसार परियोजना का लगभग 95 प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। शेष बचे कार्यों को तेजी से निपटाने के निर्देश दिए गए हैं। विभागीय सचिव ने निर्माण एजेंसियों को समयसीमा का कड़ाई से पालन करने को कहा है, ताकि तय समय पर सड़क आम लोगों के लिए खोल दी जाए।
554 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण

इंडो-नेपाल बॉर्डर सड़क परियोजना के तहत बिहार में लगभग 554 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया जा रहा है। अब तक 529 किलोमीटर से अधिक हिस्से में काम पूरा कर लिया गया है। यह सड़क पश्चिम चंपारण के मदनपुर से शुरू होकर किशनगंज के गलगलिया तक जाएगी, जिससे सीमा क्षेत्र में आवागमन सुगम होगा।
भू-अर्जन की बाधा दूर करने का निर्देश

परियोजना के कुछ हिस्सों में भू-अर्जन की समस्या सामने आई थी। सरकार ने संबंधित जिलाधिकारियों और अधिकारियों को निर्देश दिया है कि लंबित मामलों का शीघ्र समाधान कर निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए। प्रशासन को स्थानीय स्तर पर समन्वय बनाकर बाधाओं को दूर करने को कहा गया है।
808 पुलिया और 129 पुलों का निर्माण

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत अब तक 808 पुलिया और 129 पुलों का निर्माण किया जा चुका है। पुल-पुलियों के निर्माण से न केवल आवागमन आसान होगा, बल्कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में भी कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच संपर्क मजबूत होगा।
सीमा सुरक्षा को मिलेगा मजबूती

इस सड़क के निर्माण से सीमा सुरक्षा बल की चौकियों तक पहुंचना आसान होगा। सुरक्षा बलों की त्वरित आवाजाही से सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही स्थानीय लोगों को भी बेहतर सड़क सुविधा मिलने से व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुगम होगी।
विकास को मिलेगी नई दिशा

परियोजना पूरी होने के बाद सीमावर्ती जिलों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। किसानों को अपने उत्पाद बाजार तक पहुंचाने में सहूलियत होगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। सरकार का मानना है कि यह सड़क परियोजना बिहार के सीमाई क्षेत्रों के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित होगी।
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