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Darbhanga News : मैथिली में भी पढ़िए केमेस्ट्री..., रसायन शास्त्र की मूलभूत शब्दावली प्रकाशित

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सरकार ने मैथिली भाषा में रसायन शास्त्र की मूलभूत शब्दावली प्रकाशित कर दी है।



प्रिंस कुमार, दरभंगा । केंद्र की मोदी सरकार ने प्रख्यात कवि दुष्यंत कुमार की मशहूर पंक्ति को चरितार्थ कर दिया है। वह पंक्ति थी- कैसे आकाश में सूराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो।

जी हां, स्थानीय भाषाओं में भी जिस विज्ञान की पढ़ाई को असंभव माना जा रहा था, उसे संभव कर दिखाया गया है। भारत सरकार के वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग ने मिथिलांचल की भाषा मैथिली में केमेस्ट्री यानी रसायन शास्त्र की मूलभूत शब्दावली प्रकाशित कर दी है।

अब नई शिक्षा नीति के तहत इस क्षेत्र के स्कूलों में रसायनशास्त्र को मैथिली में भी पढ़ना और पढ़ाना संभव हो सकेगा। 12वीं तक के पाठ्यक्रम के लिए यह शब्दावली काफी उपयोगी साबित होगी। इसमें लगभग साढ़े तीन हजार शब्द हैं।

यह सब हो सका है आयोग और ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (एलएनएमयू) के सहयोग से। इस ऐतिहासिक कार्य में एलएनएमयू के रसायनशास्त्र विभाग के तत्कालीन अध्यक्ष डा. प्रेम मोहन मिश्र और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की भारतीय भाषा समिति के पूर्व मुख्य समन्वयक भाषा वैज्ञानिक डा. अवधेश कुमार मिश्र का विशेष योगदान रहा है।

इन दोनों की निगरानी में बनी विशेषज्ञ समिति में रसायन शास्त्र के विशेषज्ञों के अलावा अंग्रेजी, मैथिली और संस्कृत के विद्वानों को भी शामिल किया गया था।

इनमें कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. देवनारायण झा के अलावा जनकपुरी, नई दिल्ली स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के सह प्राध्यापक डा. अजय कुमार मिश्र भी थे।

इनके साथ एलएनएमयू के मैथिली की पूर्व पीजी विभागाध्यक्ष डा. बीणा ठाकुर, सीएम कालेज, दरभंगा के डा. सुरेंद्र भारद्वाज, जेएनयू के सहायक प्रोफेसर डा. संजय कुमार झा, दिल्ली विश्वविद्यालय की डा. सविता झा, दिल्ली स्थित एल एंड डी स्कूलनेट इंडिया के प्रमुख डा. वागीश कुमार झा भी थे।

आयोग की ओर से समिति में सहायक निदेशक व समन्वयक मर्सी ह्मार थीं। बता दें कि मैथिली में रसायनशास्त्र की इस मूलभूत शब्दावली के बाद राजनीति शास्त्र और पत्रकारिता शब्दावली भी आने वाली है।

इन दोनों विषयों की शब्दावली के लिए भी एलएनएमयू के पीजी विभाग में वर्कशाप हो चुका है। दरअसल, ऐसी शब्दावली मैथिली के अलावा अन्य प्रादेशिक और क्षेत्रीय भाषाओं में भी तैयार की जा रही है।


भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की योजना है कि सभी विषयों की पाठ्यपुस्तकों का मैथिली में भी अनुवाद किया जाए। इस शब्दावली से रसायनशास्त्र की किताबों के अनुवाद में मदद मिलेगी। साथ ही, स्कूल स्तर पर भी विज्ञान विषयों में तकनीकी शब्दों की कमी दूर होगी।


- डा. अवधेश कुमार मिश्र, भारतीय भाषा समिति के पूर्व मुख्य समन्वयक।
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