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महंगाई से बदली लग्न-सगाई की खरीदारी, अलीगढ़ में हल्के और डिजाइनर बर्तनों की डिमांड

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चांदी के बर्तन पसंद करते हुए ग्राहक । सौ. कारोबारी



जागरण संवाददाता, अलीगढ़। पीतल, तांबा, कांसा व स्टील की बढ़ती कीमतों से लगुन की खरीदारी के तरीके में बदलाव आ गया है। शादी वाले घरों में खरीदारी से बाजार तो गुलजार हैं, लेकिन जेब पर बढ़ते बोझ के कारण लोग भारी वजन के विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं। रस्म अदायगी के लिए भारी बर्तन की जगह हल्के खरीद रहे हैं।

लगुन के पांच पीतल के बर्तन हल्के छोटे साइज में पसंद किए जा रहे हैं। पीतल की कीमतों में दीपावली से अब तक 30 से 35 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। बीते दीपावली पर 480 रुपये प्रति किग्रा पीतल की कीमत थी। यह 720 रुपये हो गई है।

अब पीतल की हाथरस व जलेसर निर्मित ढलाई वाली परात 800 रुपये प्रति किग्रा मिल रही है। कटोरदान पहले 850 रुपये प्रति किग्रा मिल रहा था, अब 1100 रुपये में मिल रहा है।
पीतल व तांबा की कीमतों मे 30 से 35 प्रतिशत तक वृद्धि, बजट बिगड़ा

महंगाई में ग्राहकों का नजरिया बदला है। बर्तन खरीदते समय अधिकांश लोग वजन की बजाय चमक और डिजाइन पर जोर दे रहे हैं। ऐसे बर्तन चुन रहे हैं जो दिखने में आकर्षक और भारी लगें, लेकिन वजन कम हो, ताकि बजट नियंत्रित रहे। कारोबारियों के अनुसार खरीदारी की मात्रा या वजन में औसतन 20 से 35 प्रतिशत तक कटौती की गई है।
रस्म अदायगी वाले बर्तनों के वजन में कटौती

बर्तन कारोबारियों के अनुसार पिछले कुछ समय में पीतल व तांबे के दामों में 30 से 35 व तांबे में 35 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। इसका असर मध्यम वर्गीय ग्राहकों पर पड़ा है। ब्रांडेड स्टील के बर्तनों में तीन से पांच प्रतिशत तक वृद्धि है। हालांकि कंपनियां पहले से ही 20 से 25 प्रतिशत एमआरपी के दामों को लेकर बढ़ोतरी की गुंजाइश रखती हैं।
डिजाइनर की बढ़ी मांग

महावीर गंज, रामघाट रोड, सेंटर प्वाइंट, नौरंगाबाद सहित अन्य बाजारों में बर्तनों की दुकानों पर ग्राहक बढ़ी कीमतों के चलते वजन कम व डिजाइनर बर्तन चुनते देखे गए। अब एक से दो किग्रा वाली परात को पसंद कर रहे हैं। पहले परात का साइज बड़ा देखा जाता था। कलश भी कम वजन के पसंद किए जा रहे हैं।
चांदी की चढ़ी कीमत ने चेहरों की उड़ाई रंगत

चांदी की आसमान छूती कीमतों ने ग्राहकों के चेहरों की रंगत उड़ा दी है। इसकी कीमत कम हुई हैं, मगर अभी भी अति मध्यम वर्गीय लोगों की पहुंच से बाहर है। पहले शगुन के रूप में बेटी वाले अपने दामाद को उपहार स्वरूप चांदी के पांच बर्तन देते थे। मेहमानों को विदाई में चांदी का सिक्का, बेटी को पायल देने का चलन था।
ग्राहकों की संख्या 10 प्रतिशत ही रह गई

ज्वेलर्स के अनुसार अब ऐसे ग्राहकों की संख्या 10 प्रतिशत ही रह गई है। दीपावली के बाद पांच बर्तन 400 से 500 ग्राम के 60 हजार से एक लाख रुपये तक के थे। अब कीमत सवा लाख से डेढ़ लाख रुपये है। इस पर्व पर जिस चांदी के सिक्के की कीमत 1800 रुपयेथी, वह 3400 रुपये का है। पायल, बिछुआ व अन्य सुहाग के प्रतीक चांदी के आभूषण महंगे हो गए हैं।


पीतल-तांबे की कीमत में वृद्धि से ग्राहकों का बजट बिगड़ गया है। वे हल्के व डिजाइनर बर्तन ले रहे हैं। 20 से 30 प्रतिशत तक बिक्री घटी है। अति मध्यमवर्गीय लोगों से पहुंच से दूर हैं।
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अंकुर कसेरे, संचालक, बर्तन शोरूम, महावीरगंज


चांदी की कीमतें ऐतिहासिक रही हैं, लेकिन यह अभी भी अति सामान्य वर्ग की पहुंच से दूर हैं। शगुन में दिए जाने वाले बर्तनों की बिक्री 10 प्रतिशत रह गई है। बाजार की रंगत बिगड़ गई है।
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पल्लव सिंघल तिलकधारी, शोरूम मालिक, रामघाट रोड
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