AI तकनीक से बदलेगी हाइड्रोपोनिक खेती की सूरत, होगा 3 गुना अधिक उत्पादन
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/17/article/image/AI-Farmim-1771273435901_m.webpAI तकनीक से बदलेगी हाइड्रोपोनिक खेती की सूरत (फाइल फोटो)
पीटीआई, नई दिल्ली। देश के एक उद्यमी जिनकी एक दशक पहले सूखे के कारण पूरी फसल बर्बाद हो गई थी, अब कर्नाटक में महंगे मसाले और औषधीय पौधे उगाने के लिए एआइ से लैस हाइड्रोपोनिक खेती में 214 करोड़ रुपये निवेश कर रहे हैं।
हाइड्रोपोनिक खेती का मतलब बिना मिट्टी के, केवल पानी और पोषक तत्वों के घोल का उपयोग करके पौधे उगाना है। इस तकनीक में पानी में आवश्यक खनिजों को मिलाकर सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है, जिससे पौधे तेजी से बढ़ते हैं।
मैंगलोर की पनामा हाइड्रो-एक्स के संस्थापक और सीईओ विवेक राज ने कहा कि कंपनी ने कई वर्षों तक शोध एवं विकास पर 146 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद चार पेटेंट वाली एआइ प्रौद्योगिकी विकसित की हैं।
एआइ इंपैक्ट समिट के लिए यहां आए राज ने एक साक्षात्कार में बताया कि इस प्रौद्योगिकी में ऐसे प्रणाली शामिल हैं जो फसल की बीमारियों का प्रत्यक्ष लक्षण दिखने से पहले पता लगा सकती है और प्रकाश संश्लेषण के लिए अधिकतम कृत्रिम रोशनी दे सकती हैं।
40 वर्षीय राज ने कहा, \“हमें परीक्षण अवधि के दौरान अच्छे परिणाम मिले हैं और हमें ब्रिटेन, जर्मनी एवं आस्ट्रेलिया से अपनी एआइ प्रौद्योगिकी के लिए पेटेंट मिले हैं। हम इसे बड़े पैमाने पर क्रियान्वित करेंगे।\“ उनकी कंपनी ने कर्नाटक के मूडबिद्री में 16 एकड़ जमीन खरीद ली है, जहां वह वर्ष 2026 के आखिर तक हाइड्रोपोनिक खेती का बुनियादी ढांचा बनाएगी।
प्रति एकड़ में 1,200 बैग का उत्पादन
पहली वाणिज्यिक फसल जून, 2027 में आने की उम्मीद है। योजना पांच-पांच एकड़ में केसर व अदरक और बाकी छह एकड़ में हल्दी व अश्वगंधा सहित नौ औषधीय पौधे उगाने की है। केसर व अदरक को कास्मेटिक और दवा कंपनियों को निर्यात किया जाएगा, जबकि औषधीय फसलें देश में बेची जाएंगी। राज ने बताया कि परीक्षण के दौरान एआइ से लैस हाइड्रोपोनिक खेती से हर एकड़ में 1,200 बैग (प्रति बैग 60 किलोग्राम) अदरक का उत्पादन हुआ, जबकि पारंपरिक खेती से 400 बैग का उत्पादन होता था।
Pages:
[1]