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328 पावन स्वरूप मामला: HC ने कुलवंत सिंह को दी अग्रिम जमानत, FIR में देरी और साक्ष्यों की कमी पर उठाए सवाल

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कुलवंत सिंह को 328 लापता स्वरूप मामले में अग्रिम जमानत मिली (फाइल फोटो)



राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने वर्ष 2016 में कथित तौर पर लापता हुए श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 पवित्र स्वरूपों से जुड़े मामले में आरोपी कुलवंत सिंह को अंतरिम अग्रिम जमानत प्रदान कर दी है। जस्टिस सूर्य प्रताप सिंह की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया और सुनवाई की तिथि 28 अप्रैल निर्धारित की।

यह मामला 7 दिसंबर 2025 को दर्ज एफआइआर से संबंधित है, जिसे ‘सिख सद्भावना दल’ की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) अमृतसर की अभिरक्षा में रखे गए 328 पवित्र स्वरूप वर्ष 2016 में गायब पाए गए थे।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने आपसी मिलीभगत से पवित्र स्वरूपों की अनधिकृत छपाई, वितरण, गायब करने और उनके साथ अनुचित व्यवहार करने जैसी गतिविधियों को अंजाम दिया। साथ ही संस्थान के साथ लगभग 9.82 लाख रुपये की धोखाधड़ी, साक्ष्यों के नष्ट करने और सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के भी आरोप लगाए गए।

अदालत के सामने यह दलील दी गई कि याचिकाकर्ता कुलवंत सिंह न तो एसजीपीसी के कर्मचारी हैं और न ही रिकॉर्ड पर ऐसा कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य है, जिससे यह साबित हो सके कि उन्होंने पवित्र ग्रंथों के प्रति किसी प्रकार का अनादर किया हो। अदालत ने यह भी नोट किया कि एफआईआर काफी देरी से दर्ज की गई है और देरी के संबंध में कोई संतोषजनक कारण भी रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं है।

कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि शिकायत एसजीपीसी की ओर से दर्ज नहीं कराई गई, जबकि धार्मिक मामलों की प्राथमिक जिम्मेदारी उसी संस्था की है। अदालत के अनुसार, मामले में एकत्र किए जाने वाले अधिकांश साक्ष्य दस्तावेजी प्रकृति के हैं, इसलिए आरोपी की हिरासत में पूछताछ से कोई विशेष लाभ मिलने की संभावना नहीं है।

पीठ ने कहा कि अगर किसी प्रकार की बरामदगी या जांच की आवश्यकता होती है तो याचिकाकर्ता को जांच अधिकारी द्वारा बुलाए जाने पर जांच में शामिल होने के निर्देश देकर भी यह प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। अदालत ने यह भी माना कि जांच और मुकदमे की कार्यवाही निकट भविष्य में पूरी होने की संभावना नहीं है और ऐसा कोई संकेत रिकॉर्ड पर नहीं है कि आरोपी जमानत मिलने पर साक्ष्यों से छेड़छाड़ करेगा, गवाहों को प्रभावित करेगा या जांच में सहयोग नहीं करेगा।
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