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गहने-फर्नीचर बेचकर बनी First Indian Film, मर्दों ने ही निभाए थे औरतों के किरदार; 4 साल बाद जलकर खाक हुई मूवी!

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116 साल पहले बनी थी भारत की पहली फिल्म। फोटो क्रेडिट- एक्स



एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। एक दौर था, जब भारत में फिल्मी कलाकारों को न कोई प्रोफेशन माना जाता था और ना ही खास सम्मान मिलता था। जब भारत की पहली फुल लेंथ फीचर फिल्म बन रही थी, तब डायरेक्टर ने छुप-छुपाकर अपनी फिल्म बनाई थी। उन्होंने फिल्म के क्रू से कह दिया था कि वे दूसरों को बताएं कि किसी फिल्म की शूटिंग के लिए नहीं जा रहे हैं, बल्कि एक फैक्ट्री में काम करने जा रहे हैं।

उस दौर में एक शख्स आए और उन्होंने न सिर्फ फिल्मों की नींव रखी बल्कि एक सिनेमा को जन्म दिया। यह शख्स हैं भारतीय सिनेमा के जनक धुंडिराज गोविंद फाल्के उर्फ दादासाहेब फाल्के (Dadasaheb Phalke)। साल 1910 में दादासाहेब ने साइलेंट फिल्म \“द लाइफ ऑफ क्राइस्ट\“ देखी। यह देखते ही उन्हें भी सच्ची कहानी को पर्दे पर उतारने का जुनून सा छा गया।

दादासाहेब फाल्के फिल्ममेकिंग सीखने के लिए लंदन गए, वो भी सिर्फ दो हफ्ते के लिए। वापस भारत आए, अपनी प्रोडक्शन कंपनी खोली, फिल्ममेकिंग से जुड़े इक्विपमेंट खरीदे। टीम बनाई और उनसे कहा कि वे दूसरों को बताएं कि वह एक फैक्ट्री में काम कर रहे हैं।
भारत की पहली फिल्म

दादासाहेब फाल्के की पहली फिल्म के लिए कोई फीमेल हीरोइन भी नहीं मिल रही थी। ऐसे में महिलाओं का किरदार भी हीरो ने ही निभाए। जब दादासाहेब फिल्म बना रहे थे तो आर्थिक विपत्ति भी आई। उस वक्त उन्होंने घर के फर्नीचर और पत्नी के गहने भी बेच दिए थे।

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Photo Credit - IMDb
8 महीने में बनकर तैयार हुई थी फिल्म

इतने बलिदानों और करीब 8 महीने की मशक्कत के बाद आखिरकार भारत की पहली फुल लेंथ फीचर फिल्म \“राजा हरिश्चंद्र\“ (First Indian Film Raja Harishchandra, 1913) बनी। फिल्म में डीडी डबके ने राजा हरीश्चंद्र की भूमिका निभाई थी, जबकि एक्टर अन्ना सलुंके कला कंशिक की पत्नी की भूमिका निभाई थी।
फिल्म को नहीं मिल रहे थे थिएटर्स

यह साइलेंट फिल्म राजा हरिश्चंद्र पर आधारित थी। जब दादासाहेब की ये फिल्म रिलीज होने के लिए आई तो आलोचनाओं के चलते थिएटर में स्क्रीनिंग ही नहीं मिली। मगर उन्होंने हार नहीं मानी और लिमिटेड लोगों तक फिल्म पहुंचाने की सोची। बाद में इसे मुंबई के ओलंपिया थिएटर में रिलीज किया गया। आखिरकार एक महीने बाद फिल्म को बड़े पर्दे पर रिलीज किया गया और यह सुपरहिट हुई।

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Photo Credit - IMDb
ओरिजिनल फिल्म के प्रिंट में लग गई थी आग

इस तरह दादासाहेब ने फिल्म इंडस्ट्री की नींव रखी और भारतीय माइथोलॉजिकल स्टोरीज को दुनिया के सामने पेश किया। IMDb के मुताबिक, 1917 में ओरिजिनल फिल्म की आखिरी प्रिंट जल गई थी। हालांकि, दादासाहेब ने हार नहीं मानी। उन्होंने साल 1917 में ही पहली भारतीय फीचर फिल्म राजा हरिश्चंद्र (1913) का शॉर्ट वर्जन सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र बनाई थी। ओरिजिनल फिल्म कुल चार रील्स में बनी थी जिसके सिर्फ दो रील्स ही नेशनल फिल्म अर्काइव ऑफ इंडिया (NFAI) में मौजूद है।

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