हिमाचल विधानसभा सत्र: राज्यपाल ने नहीं पढ़ा पूरा अभिभाषण, दो पैरा पढ़कर बोले- ...बाकी सदस्य पढ़ लें; CM की आई प्रतिक्रिया
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/16/article/image/Himachal-Governor-1771232568380_m.webpहिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल। जागरण आर्काइव
जागरण टीम, शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल के अभिभाषणा के साथ शुरू हुआ। लेकिन राज्यपाल ने अभिभाषण मात्र 2 मिनट 1 सेकेंड में ही खत्म कर दिया। राज्यपाल ने अभिभाषण के शुरुआत के दो पैरा पढ़े और अभिभाषण के अंत का पैरा पढ़ा। बाकी अभिभाषण को लेकर राज्यपाल ने कहा कि इसे सदस्य पढ़ सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश में इससे पहले भी दो बार ऐसा हुआ है। 2015 में जब कल्याण सिंह प्रदेश के राज्यपाल थे तो उन्होंने पूरा अभिभाषण नहीं पढ़ा था। उनके पास दो राज्यों का कार्यभार होने और व्यस्तता के कारण ऐसा किया था।
इसके अलावा पूर्व जयराम ठाकुर सरकार के समय राज्यपाल बंडारु दत्तात्रेय ने भी अभिभाषण अधूरा छोड़ा था। तब विपक्ष में बैठे कांग्रेस विधायकों के विरोध के कारण उन्होंने अभिभाषण पूरा नहीं पढ़ा था व सदन में खूब हंगामा हुआ था।
विधानसभा से लोकभवन निकले राज्यपाल
राज्यपाल ने अभिभाषण को लेकर मीडिया से कोई बात नहीं की। राज्यपाल विधानसभा से सीधे लोक भवन के लिए निकल गए। मीडिया ने उनसे बात करने का प्रयास किया, लेकिन वह कोई प्रतिक्रिया दिए बिना निकल गए।
राज्यपाल के अभिभाषण पर क्या बोले सीएम
राज्यपाल के मात्र 2 मिनट 1 सेकेंड के अभिभाषण पर मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने ज्यादा टिप्पणी नहीं की। सीएम ने कहा– राज्यपाल के अभिभाषण में पैरा 3 से 16 तक संविधानिक बातें लिखी गई हैं। राज्यपाल ने कहा कि आप आरडीजी पर चर्चा करें, सरकार भी इस पर सदन में चर्चा चाहती है और भाजपा का रुख जानना चाहती है।
आखिर क्यों नहीं पढ़ा अभिभाषण
अभिभाषण केंद्र सरकार की ओर से आरडीजी यानी राजस्व घाटा अनुदान बंद करने पर केंद्रित था। ऐसे में राज्यपाल ने शुरुआती और अंतिम पैरा पढ़कर इसे छोड़ दिया। इस पर अब चर्चा आरंभ हो गई है।
राज्यपाल के अभिभाषण के बाद सदन में आरडीजी का मुद्दा
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में इस बार परंपरा से अलग तस्वीर देखने को मिली। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल के अभिभाषण के बाद जहां सामान्यतः धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होती रही है, वहीं इस बार सरकार सीधे केंद्र सरकार द्वारा बंद की गई राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) के मुद्दे पर सदन में बहस प्रारंभ होगी।
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