Pradosh Vrat 2026: चैत्र महीने में कब-कब है प्रदोष व्रत? यहां नोट करें शुभ मुहूर्त और महत्व
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/15/article/image/pradosh-vrat-2026-1771166422242_m.webpPradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत के लाभ
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में चैत्र महीने का खास महत्व है। यह महीना जगत जननी आदिशक्ति देवी मां दुर्गा को समर्पित होता है। इस महीने में चैत्र नवरात्र मनाया जाता है। चैत्र नवरात्र के प्रथम दिवस से हिंदु नववर्ष की शुरुआत होती है। इस शुभ अवसर पर जगत की देवी मां दुर्गा और उनके नौ रूपों की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। वहीं, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर रामनवमी मनाई जाती है।
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चैत्र महीने में कई प्रमुख व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं। इनमें पाक्षिक एकादशी और प्रदोष व्रत भी शामिल हैं। प्रदोष व्रत कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। साथ ही मनचाहा वरदान पाने के लिए व्रत रखा जाता है। आइए, अक्टूबर माह के प्रदोष व्रत की तिथि एवं शुभ मुहूर्त (Lord Shiva Puja Vidhi) जानते हैं-
प्रदोष व्रत 2026 सही तिथि और शुभ मुहूर्त (Pradosh Vrat 2026 Date and Shubh Muhurat)
वैदिक पंचांग के अनुसार, सोमवार 16 मार्च को सुबह 09 बजकर 40 मिनट पर चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत होगी। वहीं, 17 मार्च को त्रयोदशी तिथि का समापन सुबह 09 बजकर 23 मिनट पर होगा। त्रयोदशी तिथि पर भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा प्रदोष काल में होती है। इसके लिए 16 मार्च को चैत्र माह का पहला प्रदोष व्रत मनाया जाएगा।
इस दिन भगवान शिव की पूजा का शुभ समय शाम 06 बजकर 30 मिनट से लेकर रात 08 बजकर 54 मिनट तक है। सोमवार के दिन पड़ने के चलते यह सोम प्रदोष व्रत कहलाएगा।
प्रदोष व्रत 2026 शुभ मुहूर्त और योग (Pradosh Vrat 2026 Date and Shubh Muhurat)
वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 30 मार्च को सुबह 07 बजकर 09 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, 31 मार्च को त्रयोदशी तिथि सुबह 06 बजकर 55 मिनट पर समाप्त होगी। त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष काल में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा और साधना की जाती है। इसके लिए 30 मार्च को प्रदोष व्रत मनाया जाएगा।
इस दिन भगवान शिव की पूजा का शुभ समय शाम 06 बजकर 38 मिनट से लेकर 08 बजकर 57 मिनट तक है। चैत्र माह का दूसरा प्रदोष व्रत भी सोमवार के दिन पड़ रहा है। इसके लिए यह सोम प्रदोष व्रत कहलाएगा।
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