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NSE IPO की लिस्टिंग में नई अड़चन! दिल्ली हाई कोर्ट में SEBI NOC के खिलाफ याचिका दाखिल; क्या दी गयी है दलील?

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एनएसई के आईपीओ में एक और नई अड़चन



नई दिल्ली। भारत के सबसे बड़े स्टॉक मार्केट एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE), की लिस्टिंग एक नई रुकावट आ गयी है। NSE के पब्लिक होने की चर्चा करीब दस साल से चल रही है। मगर एक्सचेंज को इस सफर में एक और रुकावट का सामना करना पड़ रहा है। NSE के प्रस्तावित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (Sebi) की तरफ से जारी किए गए नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में एक रिट पिटीशन फाइल की गई है। क्या है ये याचिका और किसने की है दाखिल, आइए जानते हैं।
किसने और क्यों फाइल की याचिका?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नई दिल्ली के रहने वाले और पूर्व ज्यूडिशियल ऑफिसर 72 साल के केसी अग्रवाल ने 10 फरवरी को यह पिटीशन फाइल की है। इसमें सेबी के 30 जनवरी के क्लियरेंस पर सवाल उठाए गए हैं। इससे NSE की लिस्टिंग का इंतजार और बढ़ सकता है।
एक्सचेंज 2016 से पब्लिक होने की कोशिश कर रहा है, लेकिन बार-बार रेगुलेटरी जांच और पिछले विवादों ने प्लान को रोक रखा है। दिल्ली हाई कोर्ट के सोमवार या इस हफ्ते के आखिर में इस मामले पर सुनवाई करने की उम्मीद है, और उसके फैसले से NSE की लिस्टिंग की कहानी में अगले कदमों पर असर पड़ने की संभावना है।
क्या दी गयी है याचिका में दलील?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अग्रवाल की पिटीशन में सेबी के कॉर्पोरेट एक्शन एडजस्टमेंट (CAA) फ्रेमवर्क पर फोकस किया गया है, जिसे बोनस इश्यू, स्टॉक स्प्लिट और एक्स्ट्राऑर्डिनरी डिविडेंड के दौरान डेरिवेटिव ट्रेडिंग में “वैल्यू न्यूट्रैलिटी“ सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया गया था।
आसान शब्दों में, इसका मतलब है कि ऐसे कॉर्पोरेट एक्शन से पहले और बाद में डेरिवेटिव ट्रेडर्स की इकोनॉमिक पोजीशन में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए। अग्रवाल का आरोप है कि NSE ने इस फ्रेमवर्क का उल्लंघन किया। प्राइस और क्वांटिटी दोनों को एडजस्ट करने के बजाय, NSE ने सिर्फ प्राइस बदले, और अग्रवाल समेत डेरिवेटिव ट्रेडर्स के अकाउंट से सीधे डिविडेंड के बराबर रकम डेबिट कर ली।
\“कानून के खिलाफ है डेबिट\“

सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) एक्ट के तहत, डिविडेंड सिर्फ शेयरहोल्डर्स के होते हैं, डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स के नहीं। पिटीशन में कहा गया है कि, “इसलिए जिस डेबिट पर सवाल उठाया गया है, वह कानून के खिलाफ है।“
अग्रवाल ने कहा कि NSE में उनकी शिकायतों को बिना सुनवाई के बंद कर दिया गया, और सेबी ने बिना इंडिपेंडेंट रिव्यू के एक्सचेंज के एक्शन को सही ठहराया। उन्होंने आगे कहा कि डेबिट किए गए फंड्स की डिटेल्स मांगने वाले राइट टू इन्फॉर्मेशन (RTI) रिक्वेस्ट को बार-बार रिजेक्ट कर दिया गया, जिससे “पूरी जानकारी का वैक्यूम“ बन गया और जनवरी 2026 तक सेबी चेयरपर्सन को भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं मिला।

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“शेयर से जुड़े अपने सवाल आप हमें business@jagrannewmedia.com पर भेज सकते हैं।“

(डिस्क्लेमर: यहां एक आगामी आईपीओ की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)
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