लद्दाख में जल्द खत्म होगी कड़ाके की सर्दी, दोस्मोचे और लिकिर मठ महोत्सव शुरू
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/15/article/image/mahaotsav-1771172971359_m.webpलद्दाख में दोस्मोचे और लिकिर मठ महोत्सव शुरू। फोटो जागरण
राज्य ब्यूरो, जम्मू। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में कड़ी सर्दी का दौर अब जल्द खत्म होने वाला है। कड़ी ठंड के कारण सर्दियों के महीनों में सूने पड़े खेतों में अब जल्द रौनक लौट आएगी।
लद्दाख के लेह, कारगिल जिलों में प्रदेश में सर्द मौसम के खत्म होने के प्रतीक दो दिवसीय दोस्मोचे व लिकिर मठ महोत्सव रविवार सुबह धार्मिक रीति, रिवाज के साथ को शुरू हो गए। लेह जिले के दूरराज इलाकों में गहरी धार्मिक श्रद्धा व पारंपरिक भव्यता के साथ मनाए जा रहे ये मठ उत्सव क्षेत्र में कठोर सर्दियों का मौसम के खत्म होने व कृषि सत्र की तैयारियों की शुरुआत का संदेश देते हैं।
मठ महोत्सवों के दौरान बौद्ध भिक्षुओं ने पारंपरिक मुखौटा नृत्य प्रस्तुत करने के साथ ढोल, अन्य वाद्य यंत्र बजाकर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया। लेह के दोस्मोचे मठ के साथ लिकिर मठ में भी इस पर्व का विशेष आयोजन किया जा रहा है।
मठों के प्रांगण में आयोजित किए गए जा रहे कार्यक्रमों में पारंपरिक परिधान पहले स्थानीय लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। मठों के साथ लेह पैलेस में भी कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है। लद्दाख की स्मृद्ध संस्कृति के प्रतीक इन कार्यक्रमों के माध्यम से लद्दाख में शांति, समृद्धि व नए वर्ष के मंगलमय होने की कामना भी की जा रही है।
ये महोत्सव बुरी शक्तियों व नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के उद्देश्य से भी आयोजित होते हैं। ऐसे में उत्सव के दौरान पारंपरिक अनुष्ठानों के तहत लामा आटे से बने धार्मिक प्रतीकों व धागों से बने कुछ प्रतीक तैयार करते हैं। मान्यता है कि ये प्रतीक नकारात्मक शक्तियों को अपने भीतर समाहित कर लेते हैं। उत्सव के दूसरे दिन सोमवार को इन प्रतीकों को भव्य जुलूस निकालकर नष्ट किया जाएगा। इसे बुराई के पूर्ण विनाश का प्रतीक माना जाता है।
लद्दाख में मार्च महीने से बदलने वाला मौसम क्षेत्र के लोगों में उत्साह लाता है। मार्च महीने के आरंभ से ही लद्दाख में खेती जाेर पकड़ लेती है। सड़कों पर यातायात सुचारू होने के साथ ही लद्दाख के लेह व कारगिल में पर्यटकों का आगमन शुरू हो जाता है। अप्रैल महीने में देश, विदेश के पर्यटकों को खुबानी के फूलों से सजे वागों में लाने के लिए पर्यटन महोत्सव शुरू हो जाते हैं।
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