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MP के सरकारी अस्पतालों में PPP मोड की MRI सेवा ठप होने की कगार पर, मरीजों की बढ़ेगी दिक्कत

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एमआरआई सेवा (प्रतीकात्मक चित्र)



डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों में पीपीपी मोड पर संचालित एमआरआई सेवाएं वित्तीय संकट से जूझ रही हैं। आयुष्मान भारत और बीपीएल श्रेणी के मरीजों को निश्शुल्क जांच उपलब्ध कराने वाली निजी एजेंसी ने बकाया भुगतान न मिलने पर सोमवार से सेवाएं बंद करने का निर्णय लिया है। एजेंसी का दावा है कि भोपाल, इंदौर और ग्वालियर सहित बड़े शहरों का करीब दो करोड़ रुपये भुगतान लंबित है।
भोपाल में 50 लाख अटके

भोपाल के जेपी अस्पताल में एमआरआई सेंटर चला रही एजेंसी को पिछले एक वर्ष से आयुष्मान योजना की राशि नहीं मिली है। अकेले भोपाल जिले में लगभग 50 लाख रुपये का भुगतान लंबित बताया गया है। एजेंसी संचालकों का कहना है कि कई बार पत्राचार और स्मरण कराने के बावजूद बजट जारी नहीं हुआ, जिससे मशीनों के रखरखाव और कर्मचारियों के वेतन भुगतान में गंभीर दिक्कतें आ रही हैं।
इंदौर-ग्वालियर में भी वही हाल

इंदौर और ग्वालियर के जिला अस्पतालों में भी स्थिति समान बताई जा रही है। अन्य जिलों में संचालित एजेंसियां भी भुगतान न मिलने की स्थिति में काम बंद करने पर विचार कर रही हैं।
मरीजों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ

सेवाएं बंद होने की स्थिति में रोजाना एमआरआई कराने पहुंचने वाले आयुष्मान कार्डधारकों और बीपीएल मरीजों को निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों में तीन से छह हजार रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं। गंभीर रोगियों के ऑपरेशन और उपचार में देरी की आशंका भी जताई जा रही है, क्योंकि एमआरआई रिपोर्ट कई मामलों में अनिवार्य होती है।

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एजेंसी का पक्ष

कृष्णा डायग्नोस्टिक सेंटर के ऑपरेशन हेड रतन सिंह के अनुसार, आयुष्मान योजना के तहत पिछले एक वर्ष से भुगतान लंबित है। भोपाल में 50 लाख और इंदौर-ग्वालियर को मिलाकर करीब दो करोड़ रुपये बकाया हो चुके हैं। फंड न मिलने से मशीनों की ईएमआई, मेंटेनेंस और स्टाफ वेतन देना संभव नहीं रह गया है।

उन्होंने बताया कि उच्च अधिकारियों को स्थिति से अवगत करा दिया गया है, लेकिन समाधान न होने की स्थिति में सोमवार से आयुष्मान और बीपीएल श्रेणी की मुफ्त एमआरआई जांच बंद करने का निर्णय लिया गया है।


एमआरआई सेंटर के बकाया भुगतान का मामला संज्ञान में है। आयुष्मान योजना के दावों के भुगतान की प्रक्रिया राज्य स्तर से होती है। हम संबंधित विभाग और आयुष्मान सेल से चर्चा कर रहे हैं ताकि बजट जल्द जारी हो सके। एजेंसी से भी बात कर रहे हैं कि वे सेवाएं बंद न करें।
- डॉ. मनीष शर्मा, सीएमएचओ, भोपाल
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