बिहार के 8 जिलों को सीधे हवाई संपर्क की तैयारी; इलाज, व्यापार और पर्यटन को पंख, छोटे विमानों से बदलेगा सफर
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/15/article/image/Aircraft-1771160792169_m.webpआने वाले समय में बिहार के कई जिलों से उड़ेगा विमान। सांकेतिक तस्वीर
राज्य ब्यूरो, पटना। Bihar Top: सरकार ने बिहार में क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने और संपर्कता बढ़ाने के उद्देश्य से आठ जिलों से 19 सीटर हवाई उड़ान योजना पर काम कर रही है।
काम प्राथमिकता में हो इसके लिए इन जिलों में हवाई उड़ान की संभावना तलाशने के लिए पूर्व-व्यवहार्यता अध्ययन (Pre-feasibility study) की अनुमति दी गई है।
इस काम के लिए 3.64 करोड़ रुपये की राशि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को जारी भी की गई है। जानकारी के अनुसार सरकार मधुबनी, बीरपुर, मुंगेर, वाल्मीकिनगर, भागलपुर एवं सहरसा के अलावा मोतिहारी एवं छपरा में 19-सीटर विमान संचालन की संभावनाओं की दिशा में कार्य कर रही है।
व्यवहारिकता का चलेगा पता
प्री-फिजिब्लटी स्टडी के तहत संबंधित स्थलों की भौगोलिक स्थिति, रनवे की संभावनाएं, भूमि उपलब्धता, यात्री मांग, सुरक्षा मानक, पर्यावरणीय प्रभाव तथा लागत-लाभ विश्लेषण जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच की जाएगी।
अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि इन स्थानों पर छोटे विमानों के नियमित संचालन की व्यवहारिकता कितनी है। इसी के आधार पर आगे के कार्यों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार होगा।
सूत्रों के अनुसार सरकार ने माना है कि 19-सीटर छोटे विमानों का संचालन शुरू होने से सीमावर्ती और पिछड़े जिलों को सीधा हवाई संपर्क मिलेगा।
वाल्मीकिनगर और बीरपुर जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए यह पहल पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा दे सकती है, वहीं मधुबनी, सहरसा और मुंगेर जैसे जिलों को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना के तहत नया अवसर मिल सकता है।
भागलपुर और मोतिहारी जैसे शहर पहले से व्यावसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं, जहां हवाई सेवा शुरू होने से निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है।
छोटे विमानन ढांचे लाएंगे बदलाव
जानकार मानते हैं कि छोटे विमानन ढांचे के विकास से राज्य के भीतर आवागमन का समय कम होगा और आपातकालीन चिकित्सा, आपदा प्रबंधन तथा प्रशासनिक पहुंच भी बेहतर होगी।
यदि अध्ययन रिपोर्ट सकारात्मक आती है, तो आने वाले समय में इन जिलों को क्षेत्रीय हवाई मानचित्र पर प्रमुख स्थान मिल सकता है।
सरकार के इस कदम को बिहार में संतुलित क्षेत्रीय विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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